एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - ध्यान

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एक साधू को लगभग नंगे ही नहाते हुए देखकर राधा अपने सहेलियों के साथ दूसरे तरफ मुँह करके बैठ गई और बोली “महात्मा जी निकल आएँ तब हम लोग नहाएंगे”। साधू बाहर निकलकर बोला “तुम लोग भी कजरी तीज के अवसर पर सरयू स्नान करने आई हो”।

राधा बोली “हाँ। आप कहाँ से आये हैं” ?

साधू बोला “लगभग सौ किलोमीटर दूर से आया हूँ। लेकिन औरतें तो अपने पति को बेलन से मारती हैं और सरयू व गंगा में नहाने आती हैं”।

राधा बोली “आप तो महात्मा हैं, इतनी दूरी तय करके नहाने आये हैं। सरयू में स्नान करके भगवान का ध्यान करना चाहिए। राम नाम लेना चाहिए। लेकिन आपका ध्यान कहीं और है। आप को अपना काम करना चाहिए। आप सन्यास ले चुके हैं। औरतें अपने पति को मारती हैं तो आपका क्या जाता है ? क्या हर औरतें एक तरह ही होती हैं” ?

यह सुनकर आस-पास के लोग हँसने लगे और महात्मा जी सरयू तट पर बैठ कर ध्यान करने लग गए।

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डॉ एस के पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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चित्र - अमरेन्द्र, aryanartist@gmail.com  फतुहा, पटना की कलाकृति

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