सोमवार, 10 अक्तूबर 2011

मुरसलीन (साकी) की रचना

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उसने मेरी वफा का ऐसा सिला दिया

चाहत को मेरी रूसवा सरे आम कर दिया

 

दामन के मेरे फूल कुछ ऐसे चुरा कर

आंखों में मेरी अश्‍कों के कांटों को भर दिया

 

चाहता मैं फिर भी था अपना बना लूं लेकिन

बदनामियों के डर से मेरा रूख पलट गया

 

पीता न था मैं आकर साकी तेरी गली में

देखा तेरा फरेब तो फिर मैं बदल गया

 

हर बार यही सोच कर पीता हूं छोड दूं

हर बार मैं पीता रहा और शराबी बन गया

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मुरसलीन (साकी)

जिला लखीमपुर खीरी (यू.पी.)

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