बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

ज्योति चौहान की दीपावली कविता - दीपावली है दीपों का त्यौहार

दीपावली, दीपों का त्यौहार ,

लाता खुशियाँ ढेर अपार ,

आता साल में एक ही बार ,

लाता सबके लिए प्यार.

 

रोशनी से भरता गगन को ,

बच्चे लड़ी, पटाखे और फुलझड़ी जलाते हुए,

मिठाई, मेवे ,खील बताशे और खाते हुए,

तरह-तरह के व्यंजन बनाती मम्मी,

बच्चे पूरे उत्साह से भरपूर .

 

दीवाली धूमधाम से मनाते हुए ,

दुश्मन भी हाथ मिलाते हुए ,

दोस्त गले मिलते हुए ,

नए-नए कपड़े पहने बच्चे.

 

लक्ष्मी-गणेश पूजा करती मम्मी,

गिफ्ट बांटते पास-पड़ोसी ,

दीपावली खुशियों का  त्यौहार ,

यही तो है मेरा सबसे प्रिय त्यौहार.

--

परिचय :

नाम: ज्योति चौहान

जन्म स्थान :-डेल्ही ,मूलत: उत्तर प्रदेश की है

जन्म तिथि :- 12.6.1982.

शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, साथ ही रसायन-शास्त्र में स्नातकोतर,शिक्षा में स्नातक , पुस्तक- विज्ञान तथा सूचना तकनिकी में स्नातक,और कंप्यूटर में पी.जी.डी.सी.ए

व्यवसाय :- एक वहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं . नोएडा में अनुसंधान और विकास विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं.

रूचि : सामाजिक सेवा , पड़ना तथा कविता , निवंध इत्यादि लिखना

उपलब्धी : स्कूलिंग में कविता ,निवंध इत्यादि तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में पुरुस्कार प्राप्ति, कवितायें प्रसिद समाचार- पत्र , मैगज़ीन, वेब-पत्रिका,वेब-पोर्टल पर प्रकाशित

संपर्क :-

ज्योति चौहान

सेक्टर-२२, नॉएडा

jyotipatent@gmail.com

1 blogger-facebook:

  1. ज्योति जी, रवि जी,
    आपको, परिजनों तथा मित्रों सहित दीपावली पर मंगलकामनायें! ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे।

    ********************
    साल की सबसे अंधेरी रात में*
    दीप इक जलता हुआ बस हाथ में
    लेकर चलें करने धरा ज्योतिर्मयी

    बन्द कर खाते बुरी बातों के हम
    भूल कर के घाव उन घातों के हम
    समझें सभी तकरार को बीती हुई

    कड़वाहटों को छोड़ कर पीछे कहीं
    अपना-पराया भूल कर झगडे सभी
    प्रेम की गढ लें इमारत इक नई
    ********************

    उत्तर देंहटाएं

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