शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

सीमा ‘स्‍मृति’ की तीन कविताएँ

 

image

1- जीवन चक्र

काट दिए जाते पेड़

जरूरत पड़ने पर

वर्षों पश्‍चात्

जमीन में बहुत गहरे तक

दबी जडें

कभी कभी

उचित हवा पानी ऊर्जा पाकर

फूट पड़ती हैं लेकर कोमल कोंपलें ।

वो कहते हैं

मैं

वो कटा पेड़ हूँ

जिसकी जड़ों को भी जलाया गया

वक्‍त की जरूरत के नाम पर धू- धू करके

और

उसी क्षण

नया एक वृक्ष तभी लगाया था

नयी हरियाली के नाम पर ।

क्‍यों जड़ें तुम्‍हारी याद करती हैं

क्‍यों जडें उम्‍मीद करती हैं

सूखी जली जड़ों में

फूट पडेंगी कोंपलें।

यही है जीवन चक्र

वर्तमान में हरियाली देता है

वो नया पेड़

जीवन संगीत बना

वो पेड़

समझो, या ना समझो !

-0-

 

2-‘संघर्ष’

अन्‍धकार से लड़ने की परिभाषा से दूर,

रोशनी से आवरित उस भीड़ में,

जिसकी चकाचौंध में मिचमिचाने लगी है आँखें,

धुँधलाने लगे हैं रास्‍ते,

खो गई है शक्‍ति,

पस्‍त हो गई है सारी धारणाएँ,

‘संघर्ष’ सामर्थ्‍य और चेतना के संग

मन मतवाला

निकल पड़ा है

किसी नये सेतु के सहारे

उस पार

समकालीन जीवन -मं‍‍‍‍‍थन करने ।

 

3 -'प्रवाह'

नई मुलाकात ने दी

दस्‍तक

जीवन -प्रवाह की

धारा तो बहती है

खामोश कहती है

थाम लो हाथ

मुसाफिरों

मैं रुख बदलने को हूँ।

-0-

--

(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com , फतुहा, पटना की कलाकृति)

3 blogger-facebook:

  1. कम शब्दों में बह्त सारा अनुभूत सत्य पिरो दिया है । बहुत सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहतरीन प्रस्तुती.....

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------