शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2011

साहित्य संस्‍था ‘मंथन, चण्‍डीगढ़' ने बांग्‍ला के सुप्रसिद्ध साहित्यकार से की एक मुलाक़ात

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चण्‍डीगढ़ ः साहित्य संस्‍था ‘मंथन' के सौजन्‍य से आज रविवार, दिनांक 23 अक्‍टूबर, 2011 को महावीर मुनी जैन मन्‍दिर, सैक्‍टर 23-डी, चण्‍डीगढ़ में एक साहित्‍यिक गोष्‍ठी का आयोजन सुप्रसिद्ध साहित्यकार व समालोचक मदन शर्मा ‘राकेश' की अध्‍यक्षता में हुआ, जिसमें मुख्‍यातिथि के रूप में कविराज बलवंत सिँह रावत ने शिरकत की। मंच संचालन ग़ज़लकार सुशील ‘हसरत' नरेलवी ने किया।

गोष्‍ठी के पहले चरण में ‘साहित्यकार से एक मुलाकात' के तहत ऐतिहासिक स्‍थान तामलुक, मिदनापुर, पश्‍चिमी बंगाल में स्‍वतन्‍त्रता सेनानी अनंत माजी व बिमला माजी के घर में सन्‌ 1947 में जन्‍मे सुविख्‍यात बांग्‍ला साहित्यकार बिप्‍लब माजी से रू-ब-रू का आयोजन रहा। माजी का साहित्य सफ़र सन्‌ 1964 से प्रारम्‍भ होकर निरंतर चलायमान है। इन्‍होंने पब्‍लिकेशन हाउस ‘प्रकाशन' व प्रिंटिंग प्रेस का अपना कारोबार छोड़कर खुद को साहित्य के प्रति समर्पित कर दिया। साहित्य की विभिन्‍न विधाओं में अब तक बिप्‍लब माजी की साठ किताबें आ चुकी हैं, जिनमें कविता संग्रह 17, उपन्‍यास 04, बाल साहित्य पर 6 एवं अन्‍य विधाओं में 24 किताबें शामिल हैं। बिप्‍लब माजी द्वारा रचित कई पुस्‍तकों व रचनाओं का इंगलिश, रशियन, फ्रेंच, ज़र्मनी, इटालियन, ग्रीक, जापानी, बुलगेरियन, अरबी, वियतनामी, आइैसलेंडी व हिन्‍दी, उर्दू, तमिल, मलयालम, गुजराती, उड़िया, तेलगू, आसामी, मराठी एवं सन्‍थाली में अनुवाद हो चुका है। उन्‍हें अनेक अंतरराष्‍ट्रीय व राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरस्‍कारों से भी नवाज़ा जा चुका है। इन्‍होंने कई देशों की साहित्‍यिक यात्राएं कीं व कई अंतरराष्‍ट्रीय साहित्‍यिक समारोह में भाग लिया है जिनमें मास्‍को, ताशकन्‍द, लेनिनग्राद, बे्रस, मिन्‍सक,ब्‍लादीमीर एंड शूजदल आदि शामिल हैं।

बिप्‍लब माजी की रचनाओं में ग्रामीण जीवन व प्रकृति, रीतिरिवाज़, संस्‍कृति, पिछड़े वर्ग की उपेक्षा के प्रति पीड़ा तो वेश्‍वीकरण के चलते सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक असमानताओं के प्रति आक्रोश व उत्‍तर आधुनिकता का प्रभाव आम भारतीय जन पर देखने को मिलता है। उनका मानना है कि साहित्य जहाँ समाज का निर्माण व व्‍यक्‍तित्‍व के अनेक पक्षों को सकारात्‍मकता प्रदान करता है तो वहीं साहित्य व संस्‍कृति हमारे समाज के लिए सर्वोतम सुरक्षा कवच भी है। वे इस बात के पक्षधर हैं कि ‘ग्‍लोबलाइजेशन' का स्‍वरूप बदलना चाहिए क्‍योंकि वर्तमान में इसका लाभ केवल 23 प्रतिशत को ही मिल पाता है। बिप्‍लब माजी का कहना था कि ‘‘युवा बाज़ारवाद समर्थित मानसिकता का शिकार होते जा रहे हैं जिससे कि सामाजिक मूल्‍यों का हनन्‌ हो रहा है।'' इसके अतिरिक्‍त माजी ने अपनी कुछेक बंगाली व अंग्रेज़ी कविताओं को सुनाकर कवितामय माहौल को एक नया रंग दिया व ढेरों तालियाँ बटोरीं।

गोष्‍ठी के दूसरे चरण में कवि दरबार का शुभारम्‍भ ग़ज़लकार एस0 एल0 कौशल की शानदार नज़्‍म से हुआ, तदुपरान्‍त श्रुति भगत ने ग़ज़ल, बी0 आर0 रंगाड़ा ने पंजाबी कविता, कवयित्री उर्मिला कौशिक ‘सखी' ने क्षणिकाएं, तो कवि राजेश पंकज, विजय कपूर, कवयित्री शशि कौशल, कवि दीपक खेतरपाल, जोगिन्‍द्र सिँह, अश्‍विनी, आर0 के0 भगत, आर0 के0 मल्‍होत्रा, मदन शर्मा, सुभाष शर्मा ने कविताएं तो सुशील ‘हसरत' नरेलवी, नरेन्‍द्र ‘नाज़', अमरजीत ‘अमर', जयगोपाल ‘अश्‍क' अमृतसरी, बलवंत सिँह रावत एवं मदन शर्मा ‘राकेश' ने ग़ज़ल कहकर खूब वाह-वाही लूटी।

अध्‍यक्षीय भाषण में सुप्रस़िद्ध साहित्यकार मदन शर्मा ‘राकेश' ने अपने वक्‍तव्‍य में कहा कि ‘‘यह हमारा सौभाग्‍य है कि हमें आज बांग्‍ला के सुप्रसिद्ध साहित्यकार व उनके साहित्य को जानने व समझने का अवसर मिला।'' उन्‍होंने इस प्रयास के लिए ‘मंथन, चण्‍डीगढ़' को बधाई भी दी व पढ़ी गई सभी रचनाओं को सुन्‍दर व अर्थपूर्ण बताया। अन्‍त में, संस्‍था की ओर से सभी मंचासीन महानुभावों, पधारे हुए साहित्यकार, साहित्य प्रेमियों व श्रोतागणों का आभार कवि दीपक खेतरपाल ने प्रकट किया गया।

सुशील ‘हसरत' नरेलवी अध्‍यक्ष ‘मंथन' (अवैतनिक) मो0 ः 92165-01966

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