गुरुवार, 27 अक्तूबर 2011

जौली अंकल की रम्य रचना - जमीर की आवाज

'' ज़मीर की आवाज ''

दूध के पतीले को देखते ही मिश्रा जी की पत्‍नी ने अंगारे उगलते हुए कहा कि मैं कई दिन से कह रही हॅू कि यह हमारा दूध वाला रोज दूध में पानी डाल कर दे जाता है। परंतु आप भी पता नहीं किस मिट्टी से बने हुए हो कि रोज मेरा इतना चीखने चिल्‍लाने के बावजूद भी आपके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। पत्‍नी का इतना शोर सुनने के बाद मिश्रा जी ने अगले ही पल उस दूध वाले को सबक सिखाने के लिये कमर कस ली। अपनी पत्‍नी को दिलासा देते हुए बोले कि मैं आज उस बदमाश की अक्‍कल ठिकाने लगा कर ही रहूंगा। कुछ ही देर बाद मिश्रा जी दूध वाले को दूध में मिलावट करने का आरोपी ठहराते हुए उसे खरी-खरी सुना रहे थे। मिश्रा जी उस दूध वाले को बुरा-भला कहने के साथ कह रहे थे कि मुझे लगता है चंद पैसों के लालच में तुमने अपनी इज्‍जत तो बेच ही दी है साथ ही तुम्‍हारा ज़मीर भी मर गया है।

दूध वाले ने कहा कि आपको कैसे मालूम कि मेरा ज़मीर मर चुका है। मिश्रा जी ने कहा कि तुम्‍हारी यह बेशर्मी वाली हरकतें ही साफ ब्‍यां कर रही है कि तुम्‍हारा ज़मीर मर चुका है। दूध वाले ने हैरान होते हुए कहा कि साहब जी आप तो आज पहली बार मेरी डैयरी पर आए हो और आप मेरे ज़मीर के बारे में सब कुछ कैसे जानते हो? मिश्रा जी ने पूछा कि तुम किस ज़मीर की बात कर रहे हो? दूध वाले ने कहा कि मेरी भैंस के बछड़े का नाम ज़मीर था और वो बेचारा पिछले हफ्‍ते ही मर गया था। मिश्रा जी को कुछ समझ नही आ रहा था कि यह दूध वाला सच में इतना भोला है कि इसे ज़मीर के बारे में कुछ मालूम नहीं या यह मुझे ही बेवकूफ बना रहा है। मिश्रा जी ने दूध वाले के मन को टटोलते हुए कहा कि जो लोग चेहरे पर नकली मुखौटे लगा कर अपनी असलियत को छिपाते है उन लोगों के बारे में यह कहा जाता है कि इनका ज़मीर मर गया है।

दूध वाले ने कहा कि मैं तो जैसा हॅू वैसा ही आपके सामने खड़ा हॅू मैंने तो अपने चेहरे पर कोई मुखौटा नहीं लगाया हुआ फिर आप यह सब कुछ मुझे क्‍यूं समझा रहे हो? मिश्रा जी ने उसे डांटने की बजाए प्‍यार से बात करते हुए कहा कि असल में मेरा कहने का मतलब यह है कि कुछ लोग पैसा कमाने के लालच में अपने ईमान को बेच देते हैं। मैने यह सब कुछ तुम्‍हें इस लिये कहा क्‍योंकि कई दिन से मेरी पत्‍नी शिकायत कर रही है कि तुम दूध में पानी मिला कर लाते हो। दूध वाले ने झट से कसम खाते हुए कहा साहब जी मुझे आपकी कसम, मैंने आज तक दूध में कभी पानी नहीं मिलाया। मिश्रा जी ने उससे कहा कि इतना तो मैं भी जानता हॅू कि जितने भोले तुम दिखते हो असल में इतने भोले तुम हो नहीं। अगर तुम दूध में पानी नहीं मिलाते तो फिर मेरी पत्‍नी कुछ दिनों से दूध पतला होने की शिकायत क्‍यू कर रही है? देखो भाई, भूल और गलती किसी से भी हो सकती है, अगर तुमने ऐसा कुछ किया है तो मुझे सब कुछ सच-सच बता दो। एक बार तुम यदि सब कुछ सच कह दोगे तो तुम्‍हारा ज़मीर मरने से बच जायेगा। दूध वाले ने फिर से ज़मीर का जिक्र आते ही पूछा कि साहब जी पहले तो ठीक से यह बताओ कि आप कौन से ज़़मीर की बात कर रहे हो, क्‍योंकि मैं तो किसी और ज़मीर को जानता ही नहीं।

मिश्रा जी ने उसकी नादानी को भांपने के बाद उसे सलाह देते हुए कहा कि कुछ लोग अधिक से अधिक पैसा कमाने और सुख पाने की चाह में अपने मन की आवाज को अनसुना करते हुए हताश एवं निराश होकर जब कोई गलत काम करने लगते है। ऐसे में हमारी आत्‍मा हमें उसके लिये झिंझोड़ती है। उस आत्‍मा की सकारत्‍मक आवाज को ही ज़मीर कहते है। अब दूध वाले को सारा किस्‍सा समझ आ गया था। मिश्रा जी के बात करने के तरीके से वो इतना प्रभावित हुआ कि उसने बिना देरी किये यह स्‍वीकार कर लिया कि वो दूध में पानी नहीं बल्‍कि पानी में दूध मिलाता है दूध वाले ने यह भी कबूल कर लिया कि जब भी वो यह सब कुछ करता है तो उसके मन से जरूर एक आवाज उठती थी कि तुम यह गलत कर रहे हो। लेकिन घर-परिवार की बढ़ती जरूरतों ने मुझे यह सब कुछ करने पर मजबूर कर दिया था। मिश्रा जी ने जब दूध वाले से उसकी मजबूरी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ मुफ्‍तखोर दोस्‍त और रिश्‍तेदार ऐसे पल्‍ले पड़े हुए है कि आऐ दिन उनको खुश करने के लिये मुझे काफी खर्चा करना पड़ता है। उन से पिंण्‍ड छुड़ाने के लिये चाहे उन्‍हें कुछ भी कहते रहो, लेकिन वो पीछा छोड़ते ही नहीं।

अब तक मिश्रा जी को दूध वाले की सारी मंशा ठीक से समझ आ चुकी थी। उन्‍होंने उससे कहा कि तुम जिन लोगों के बारे में बता रहे हो, ऐसे लोगों का ज़मीर कभी नहीं जागता बल्‍कि इस तरह के लोग तो समझाने पर और अधिक दांत फाड़ कर बेशर्मी पर उतर आते है। ऐसा महसूस होता है कि आजकल लोगों ने अपनी इज्‍ज़त, सम्‍मान सब कुछ भूल कर अपने ज़मीर को बाजार में नीलाम कर दिया है। मिश्रा जी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि जिंदगी के रिश्‍तों को निभाने के लिये कई बार हमारे लिये मन के विपरीत जाना भी जरूरी हो जाता है। हमारे जीवन में बहुत से ऐसे काम होते है जो हमें अच्‍छे नहीं लगते परंतु हमें उनको करना पड़ता है। कई दोस्‍त और रिश्‍तेदार ऐसे होते जो हमें अच्‍छे नहीं लगते लेकिन हर हाल में हमें उनके साथ रहना पड़ता है। लेकिन तुम एक बात अपने पल्‍ले बांध लो कि जो कोई अपने ज़मीर की आवाज सुन कर भलाई की डगर पर चलने का प्रयास करते है उनके दुख और कष्‍ट खुद-ब-खुद दूर होने लगते है। उनकी यही सोच उनके जीवन से अंधियारों को मिटा कर उज़ालों में तबदील कर देते है। जब आप दूसरों के दुखों को कम करने के लिये कदम उठाते हो तो आपके दुख ओर परेशानियां अपने आप ही कम होनी शुरू हो जाती है।

इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि कुछ भी गलत काम करने से पहले एक बार तो हर किसी का ज़मीर उसको झिंझोड़ता ही है। वो बात अलग है कि कुछ लोग अपने फायदे के लिये इधर उधर की दलीलें देकर सच को झुठलाने की नाकाम कोशिश करते है, प्रभु ऐसे लोगों को यह अक्‍कल दे कि सच हमेशा सच ही होता है। सच कभी भी, किसी भी हालात में नहीं बदलता। जो कोई सदा ही अपने ज़मीर की बात मान कर चलते है उनका सारा जीवन सुख में ही व्‍यतीत होता है। मिश्रा जी के प्रवचन सुनने के बाद जौली अंकल प्रभु से यही प्रार्थना करते है कि हमें इतना ज्ञान और शक्‍ति देना कि हम कोई भी ऐसा गलत काम न करे जिसमें हमारा ज़मीर हमारे ही हक में आवाज न दें सके।

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