मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

श्वेता दुबे की कविता - दिल की ये कैसी मुश्किल

दिल पे मुश्किल है दिल की कहानी लिखना,
जैसे बहते हुए पानी में पानी लिखना।


बहुत आसाँ है किसी के दिल पे दस्तकें देना,
जैसे अपने आईने में अक्स को पाना.
ऐ आसमाँ समझाओ इन चाँद तारों को,
तुम रोक लो वापस इन बेलगाम हवाओं को,
ये दुनिया ये लोग एक गहरा समंदर है,
जितना ये बाहर, उतना ही अन्दर है।


बहुत मुश्किल है तूफाँ से किश्ती बचा पाना,
जैसे सीप के मोती को अपनी नज़र में छुपाना.
दिल पे मुश्किल है दिल की कहानी लिखना,
जैसे बहते हुए पानी में पानी लिखना।


दिल का कारवां भी किसी झरने की तरह है,
न कोई मंजिल जिसका न कोई सफ़र है,
छूट जाने को तो राहें भी छूट जाया करती है,
तमाम उम्र चले फिर खो जाया करती है,
बहुत मुश्किल है जज़्बातों की कैद से निकलना,
जैसे छिन जाये जिंदगी और जिंदा रहने को कहना.
दिल पे मुश्किल है दिल की कहानी लिखना,
जैसे बहते हुए पानी में पानी लिखना।


कि मुश्किलों में मुश्किल बड़ी है अपनी बात को कहना,
जैसे शीशे कि दीवारों से ख़ुद को आवाज देना।

--

7 blogger-facebook:

  1. बेनामी11:53 am

    Namumkin hai ye sab kuchh shabdo me batana

    उत्तर देंहटाएं
  2. jyoti singh6:50 pm

    bahut accha likha hai.sahi baat hai bahut hi muskil hai dil ki baato ko bata pana.

    उत्तर देंहटाएं
  3. pragati1:02 pm

    shweta di ye apki kai utkrisht rachnaon me se ek hai jo maine apke hi lafzon me sunne ko mili thi.......keep going!!!!all the best..

    उत्तर देंहटाएं
  4. PUNEET7:28 pm

    DIL KO CHHOOOOOOOOOOOO.............
    LENE WALI KAVITA.
    *****EXCELLENT*****

    उत्तर देंहटाएं
  5. PUNEET7:35 pm

    DIL KO CHHOOOOOOOOO..........
    LENE WALI KAVITA.
    *****EXCELLENT*****

    उत्तर देंहटाएं

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