बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

एस. के. पाण्डेय की बाल कविता - दीपावली आई

दीपावली आई

(१)

आई-आई दीपावली आई ।

अपने संग ये खुशियाँ लाई ।।

घर-घर की हो गई सफाई ।

अच्छी-अच्छी बनी मिठाई ।।

(२)

बच्चे, बूढ़े लोग लुगाई ।

सब खाते अतिसय हर्षाई ।।

कहते आई दीपावली आई ।

घर-घर में आ धूम मचाई ।।

(३)

घर-घर में नाना पकवान ।

चाहे निर्धन या धनवान ।।

श्री, गणपति पूजे भगवान ।

दीजे प्रभु सबको धन धान ।।

(४)

गली-मोहल्ले घर बाजार ।

दुल्हन ज्यों सज सब तैयार ।।

सो खर्चे कुछ कई हजार ।

यथाशक्ति अच्छा व्यापार ।।

आया ही ऐसा त्योहार ।

खुशियों की बह चली बयार ।।

(५)

हाथी, घोड़ा घर में आये ।

बच्चे देख-देख सुख पाये ।।

जेब भरे सब दोस्त दिखाये ।

आओ हम सब मिलकर खायें ।।

घर-घर में हम दीप जलायें ।

कही अँधेरा रह न जाये ।।

(६)

बच्चों के मन सुख न समाये ।

कई पटाखे सभी बजाये ।।

मम्मी बार-बार समझायें ।

देखो कोई जल न जाये ।

(७)

मम्मी से रामू बतलाए ।

एक बार ही साल में आए ।।

हम सबको खुशियाँ दे जाए ।

मन कहता हम रोज मनाएं ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय

समशापुर (उ.प्र.) ।

URL: https://sites.google.com/site/skpvinyavali/

BLOG: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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