शंकरलाल कुमावत की हास्य व्यंग्य कविता : अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया

छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया

योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने

वो करिश्मा कर दिखाया

गरीबी हटाना जरा मुश्किल था

इसलिए,

गरीबी रेखा को ही नीचे टपकाया

 

वर्षों से जो पड़े हुए थे

गरीबी के दलदल में

उनको एक ही झटके में

आसमान से ऊँचा उठाया

जो भूखा ही सो रहा था कल तक

उसको आज बैलेंस डाइट का

स्वर्णिम ख्वाब दिखाया

 

और तो और तीस रूपये कमाने वाले

बेलदार को भी मालदार बनाया

देश पर लगा गरीबी का दाग

एक ही धुलाई में मिटाया

छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया

योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने

वो करिश्मा कर दिखाया

 

ये समाचार जब मैंने उसको सुनाया

की तू भी मालदार होई गयो है भाया

वो जोर जोर से हरे मोहन, हरे मोहन गाया

और बोला

ये कुशल तो अर्थशास्त्री का कमाल है भाया

नहीं तो यहां कितना ही आया और चला गया

लेकिन मैं तो गरीब का गरीब था न भाया

उसने जोश में वो पचास का नोट हवा में लहराया

जो उसने आज बेलदारी से था कमाया

और खुशी के मारे जोर से चिल्लाया

अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया

अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया

 

शोर सुनकर उसका बच्चा भी चला आया

उसने बच्चे को नोट थमाया और बोला

जा मेरे शेर बाजार से तीस का राशन लाना

आज से हम भी खायेंगे भर पेट खाना

और बीस की मिठाई पूरे मोहल्ले में बंटवाना

आज से हम भी अमीर है सब को बताना |

 

बाप-बेटे कि खुशी का आज नहीं था कोई ठिकाना

तभी रुआंसी सूरत लिए बच्चा बाजार से आया

मगर मिठाई नहीं वो

वो ही 100 ग्राम चावल और दाल लाया

जिससे पूरे परिवार का तो दूर

एक आदमी का भी पेट ठीक से नहीं भर पाया

उसने गुस्से में योजना आयोग पर

गलत आंकडों का आरोप लगाया

 

तभी एक पुलिस वाला

संसद कि मानहानि के आरोप में

उसे पकड़ने चला आया

इस पर वो बोला मैंने क्या गलत कहा

तुम ही बताओ तीस रूपये में

बैलेंस डाईट मिलती कहां है भाया ?

 

पुलिस वाले ने

संसद कि केंटीन का मेनू उसके हाथ में थमाया

और बोला यहाँ मिलती है

तीस रूपये में बैलेंस डाईट भाया

इसलिए,

तू संसद कि अपमान का दोषी गया है पाया

अभी निकाल पचास रुपया

नहीं, तो मैं अभी हथकड़ी लाया

डर के मारे कांपते हुए

उसने पचास रुपया पुलिस वाले को थमाया

और योजना आयोग कि रिपोर्ट खाकर

अपनी अमीरी का पहला दिन मनाया

 

इसलिए कहता हूँ कि

छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया

योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने

वो करिश्मा कर दिखाया

कम से कम एक परिवार का पेट तो भर पाया

छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया ....

---

शंकर लाल, इंदौर , मध्यप्रदेश

Email: Shankar_kumawat@rediffmail.com

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "शंकरलाल कुमावत की हास्य व्यंग्य कविता : अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.