मंगलवार, 15 नवंबर 2011

अनीता कपूर का आलेख - जीवित भारत का एक टुकड़ा

आज सुबह उठते ही चाय की प्याली के साथ जैसे ही अपना ईमेल खोला तो , 2 ईमेल एक साथ देखते ही , बहुत ही सुखद अनुभूति हुई. पहली ईमेल गांधी जी को याद करते हुए , उनकी स्मृति में ," विश्व अहिंसा एवम शांति दिवस " , मनाने के उपलक्ष्य में एक अहिंसावादी विचारदार में विश्वास रखने वाली संस्था ने भेजी थी , और दूसरी एक और ईमेल बच्चों के संस्था के तरफ से थी....उसमे मजे की बात यह थी , कि यह संस्था बच्चों के लिए और बच्चों द्वारा ही चलायी जाती है.... !

इन ईमेल को देखकर , सबसे पहली बात जो दिमाग में आई वो यह कि....हम कहाँ अपना भारत पीछे छोड़ आये हैं...हम तो भारत का एक टुकड़ा अपने ही तो साथ लायें है . और वो टुकड़ा हमेशा से जीवित है...जिसकी मिसाल यह ईमेल हैं. आज अमरीका में बसे प्रवासी भारतीय के मन में यह सवाल कुछ धुंधला सा होता जा रहा है...."कि अपना देश छोड़ कर हम यहाँ क्यों आ बसे हैं. हमारे इस फैसले से कहीं हमारे बच्चे अपनी संस्कृति और भाषा से दूर तो नहीं हो जायेंगे ?.. आदि आदि "! भारत से अमरीका आने का वैसे तो एकमात्र कारण आर्थिक बहुलता , धन वैभव अवम एक उत्तम जिंदगी बसर करना ही है. पर साथ ही में वो बच्चों को बिलकुल उसी प्रकार से पालना और संस्कार देना चाहते हैं..जैसे वो भारत में रहते हुए दे सकते थे.. और बिलकुल वैसा होना संभव भी हो पा रहा है , तो उसका श्रेय , यहाँ की बहुत सी सामाजिक संस्थाएं और स्कूल्स को भी जाता है....जो हर अवसर...चाहे वो कोई धार्मिक त्यौहार हो , गांधी जी या चाचा नेहरु का जन्मदिन हो , संस्थाओं और कम्युनिटी की तरफ से गाहे बगाहे तरह तरह से कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं . तरह तरह की प्रतोयोगिताएं भी होती रहती हैं जैसे लघु कथा...स्पेलिंग बी ..चित्रकला , नृत्य और गायन! बल्कि मेरा तो यह मानना है कि , यहाँ के प्रवासी बच्चे , न सिर्फ भारतीय संस्कृति की जानकारी पाते हैं , बल्कि यहाँ रहने की वजह से यहाँ की संस्कृति को भी जानने का अवसर पाते हैं और समय से आगे रहने की दौड़ में शामिल हो कर जल्दी ही समझदार भी हो जाते हैं..

लगभग हर प्रवासी भारतीय घर में अपनी प्रादेशिक भाषा के टीवी चैनलों की सुविधायें हैं. फलस्वरूप भारत में अन्ना हजारे जी के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन की हवा से यहाँ के बच्चे भी अछूते नहीं रहे. वो जानते हैं कि अन्ना जी कौन है और किस मकसद के लिए उन्होंने अनशन किया था.

यहाँ के बच्चों की जीवन शैली भारतीय हो , इसका पूरा पूरा ख्याल अभिवावक रखते हैं. जैसे भारतीय मित्र ही जयादा बने , नियमित मंदिर जाना और त्योहारों में हिस्सा लेना , भारतीय खान-पान , सिनेमा , नृत्य अवम गीत - संगीत सभी भारतीय हों !

अब बात जहाँ हिंदी भाषा की , या भारतीय प्रांतीय भाषा की आती है , तो यहाँ थोड़ी समझोते की स्थिति पैदा हों ही जाती है ! ऐसा नहीं है की बच्चें भारतीय भाषाओँ से अनभिज्ञ है. पर उसके लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं. बोलना तो घर में ही सीख लेते है..पर लिखना सीखने के लिए उन्हें अलग से समय निकाल कर भाषा-स्कूल में जाना होता है..

नयी पीढ़ी पूर्व और पश्चिम का संतुलन बनाये रखने का मापदंड भी अच्छी तरह से जानती है. अभिवावकों के मार्गदर्शन के कारण अमरीका में रहते हुए भी नयी पौध को खूब पता है की...कार्यशैली और तकनिकी ज्ञान तो पश्चिम का होना चाहिए पर धर्म , संस्कृति , सामजिक और पारिवारिक मूल्य पूर्व यानी भारत के ही हों..तभी वो एक संतुलित जीवन जी पायेंगे. प्रत्येक प्रवासी अभिवावक का हमेशा भरसक प्रयास है की भारतीयता रुपी वृक्ष की हरेक शाखा को उनके बच्चे छू पाएं , इस अहसास के साथ की वो साथ में लाये हुए भारत के टुकड़े को अपने अन्दर जीवित रखना जानते हैं.

परिचय

डॉ. अनीता कपूर

जन्म : भारत

शिक्षा : एम . ए.,(हिंदी एवं इंग्लिश ), पी-एच.डी (इंग्लिश),सितार एवं पत्रकारिता में डिप्लोमा.

कार्यरत : कवियत्री / लेखिका/ पत्रकार (नमस्ते अमेरिका समाचारपत्र) एवं अनुवादिका

गतिविधियाँ : मीडिया डिरेक्टर (उ प माँ ), उत्तर प्रदेश मंडल ऑफ़ अमरीका, AIPC ( अखिल भारतीय कवियत्री संघ ) की प्रमुख सदस्या, भारत में लेखिका संघ की आजीवन सदस्या, वोमेन प्रेस क्लब दिल्ली की आजीवन सदस्या, अमेरिका में भारतीय मूल्यों के संवर्धन एवं सरंक्षढ़ हेतु प्रयत्नशील. नारिका (NGO) तथा भारतीय कम्युनिटी सेंटर में समय समय पर अपनी सेवाएं देना, फ्रेमोंट हिन्दू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र में योगदान हेतु अनेकों बार पुरस्कृत, हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए हिंदी पढ़ाना और सम्मलेन करना, अमेरीका में हिंदी भाषा की गरिमा को बढ़ाना, बहुत से कवि सम्मलेन में कविता पाठ, अमेरिका और भारत के बहुत से पत्र-पत्रिकायों एवम वेब पत्रिकायों के लिए अनेक विधाओं पर लेखन,

और साथ ही साथ ज्योतिष-शास्त्र में विशेष रुचि.

विशेष: फिल्म एंड सिटी सेंटर ,नोयडा द्वारा " ग्लोबल फैशन अवार्ड ", से सम्मानित. बहाई इंटरनेशनल कम्युनिटी, दिल्ली , द्वारा " महिलायों के उत्कर्ष के लिए विशिष्ट योगदान " पुरुस्कार से सम्मानित, लायंस क्लब द्वारा सामजिक कार्यों के लिए कई बार सम्मानित, टी.वी एवम रेडियो से कई कार्यक्रम प्रसारित, हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित कवि समेलन में प्रथम पुरुस्कार.

प्रकाशन: बिखरे मोती ,कादम्बरी एवम अछूते स्वर, तीन (काव्य -संग्रह ), अनेकों भारतीय एवम अमरीका की पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, कविता, कॉलम, इंटरविउ एवम लेख प्रकाशित. प्रवासी भारतीय के दुःख दर्द और अहसासों पर एक पुस्तक प्रकाशन के लिए तैयार.

संपर्क: 3248 Bruce Drive, Fremont, CA 94539 USA

E-mail: anitakapoor.us@gmail.com, kapooranita13@hotmail.com

3 blogger-facebook:

  1. अनीता कपूर का यह लेख प्रवासी भारतियों के सांस्कृतिक जागरण की जानकारी द्देने वाला है। कविताओं की तरह आपका यह लेख भी सधा हुआ है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. Aneeta ji aapka lekh parhne se pahale meri soch me tha ki jo Bhartiya Bharat ke bahar rahate hai unki soch me aur hamari soch me kya antar ho sakta hai vo aaj samgh aaya.
    Dhanyvad

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेनामी1:45 pm

    I Like very much u dont forgat ur culture

    उत्तर देंहटाएं

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