सोमवार, 14 नवंबर 2011

गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' का व्यंग्य - पचासी साल की नवयुवती का कैट वॉक

 

सूरत की सूरत उस समय और भी हसीं हो गई जब पचासी वर्ष की नवयुवती ने रैम्‍प पर कैट वॉक किया। वैसे भी रियल लाइफ वाली फिल्‍में भले ही मुम्‍बई में बनती हों पर उनके रियलटी शो के कलाकार (जुबली) युवा कल के गौरव पथ के रियलटी शो के कलाकार रहे हैं। उस समय या तो पैदल या फिर बजाज के खटारा स्‍कूटरों पर अपनी-अपनी माशूकाओं को लादे जब वे तापी के पुल या गौरव पथ पर लैन्‍ड करते होंगे तो उस समय का नज़ारा देखते ही बनता होगा। इनकी पूर्व पीढ़ी के बटोही थोड़ा-बहुत मुँह जरूर बिचकाते होंगे पर उतना तो बिल्‍कुल नहीं जितना की खाप पंचायतों के खूसट मुखिया आज भी बिचकाते हुए मिलते हैं।

हमारा दोस्‍त ‘गिरगिट‘ खाँटी पुरबिया है। एक दिन मेरे साथ लेक व्‍यू में विचरण करते हुए उसे फतवा जारी करने का मन हो आया। उसने कहा, ‘यार गुणशेखर! यदि ये लोग मेरे गाँव की बगिया में यह हरकत करते मिलते तो मैं इनकी मुंडी काटकर संगम में बहा आता, फिर भले जिनगी भर चक्‍की पीसता।‘ मैंने गिरगिट को समझाया- ‘आज ही 49 वर्षीय कुमारी तस्‍लीमा नसरीन ने नारियों के एक नितांत नए मौलिक अधिकार की घोषणा करते हुए कहा है कि नारी को इस दुनिया में 72 पुरुषों के साथ संबंध बनाने का अधिकार है, क्‍योंकि उसके अनुसार जन्‍नत में मर्दों को 72 हूरें मिलेंगी जबकि औरतों को एक भी पट्‌ठा मुहैया नहीं करवाया जाएगा। इसीलिए उसने धरती पर जन्‍नत के सभी सुखों को भोगने का ऐलान कर दिया है और 72 में से 30-40 को भोग भी लिया है, मेरे दोस्‍त! ये स्‍वतंत्र भारत के युवा हैं, गुलाम भारत के नहीं। हाँ, तुम्‍हारा भी दिल मचल रहा हो तो कल से भौजाई को भी आराम से टहलाने लाओ।‘ उसन कहा, ‘लाहौल विलाकुव्‍वत! वह कभी न आएगी इस नरक में।‘ मैंने उसकी पीठ पर धौल जमाते हुए कहा, ‘प्‍यारे! मन में तो तुम्‍हारे भी लड्‌डू फूट रहे हैं पर कोस इस पीढ़ी को रहे हो।‘ गिरगिट थोड़ा शरमाया फिर बात बदलकर चलता बना।

हां तो विषयांतर हो गया था। कहाँ तो बात चल रही थी रैम्‍प के डायमंडी कैट वॉक की और मैं बहककर पहुँच गया था गौरव पथ। चलिए फिर से उन नई नवेली जोड़ियों की चटपटी कथा कहते हैं जिन्‍होंने दिवाली के ठीक पहले गाँधी स्‍मृति भवन को अपनी चमक से जगमगा दिया है। सुना है इन जोड़ियों ने जमकर मस्‍ती की है। सूरत के वरिष्‍ठ नागरिकों की इन जोड़ियों में शायद ही किसी ने पैंसठ-सत्‍तर से कम वसंत देखे हों।

फूलों के बाणों का संधान करते इन कामदेवों में एक पचासी वर्षीय नागरिका ने रैम्‍प पर ऐसा कैट वॉक किया कि दर्शकों ने दाँतों तले उँगली दबा ली। कैट वॉक में सबसे पहले महिलाओं और पुरूषों ने एकल वॉक फिर दम्‍पत्‍तियों ने युगल वॉक किया। अन्‍त में सभी ने जमकर डान्‍स भी किया।

मेरी राय में ये सबके सब उन्‍हत्‍तर वर्षीय अमिताभ के ‘बुड्‌ढा होगा तेरा बाप‘ से प्रेरित होकर अचानक जवान हुए युवा हैं। अच्‍छा भी है कि बच्‍चों और बूढ़ों की निठल्‍ली जमात को ढोता भारत अब तो कुछ न कुछ नया करके दिखाएगा ही।

विकास दर उत्‍पादन-क्षमता पर निर्भर करती है और यह क्षमता युवाओं में ही होती है। ऐसे में सूरत जैसे उद्यमी शहर में फैली जवानी की इस दूधिया रोशनी से निश्‍चय ही देश जगमगा उठेगा।

  -डॉक्टर गुणशेखर

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------