सोमवार, 14 नवंबर 2011

एस के पाण्डेय की बाल-दिवस विशेष बाल कविता - चालाक मेमना

चालाक मेमना

(१)

मिला न कुछ भी हो गई देर ।

मनमें सोचे भूँखा शेर ।।

भूँख के मारे पटके पैर ।

देखो किसकी नहीं है खैर ।।

(२)

चला मेमना करने सैर ।

मेरा नहीं किसी से बैर ।।

सोचा और बढ़ाया पैर ।

मम्मी उसकी मनाये खैर ।।

(३)

करते सैर हुई बहु देर ।

खुश था सोचे अभी सबेर ।।

को न जाने बिधि का फेर ।

सुख में दुख लेता है घेर ।।

ढह जाता दुख का भी ढेर ।

दुख जाए सुख आए नेर ।

(४)

फिरते देखा हुआ निहाल ।

दौड़ा शेर गरज तत्काल ।।

डरा मेमना पर चालाक ।

बुधि वालों का जग में धाक ।।

(५)

रुका सोच बुधि से अब काम ।

लूँगा सुमिर सियावर राम ।।

हँस के तुरत किया प्रणाम ।

बोला करदो काम तमाम ।।

(४)

चौंक शेर पूछा तत्काल ।

क्यों आये खुद मेरे लाल ।।

मरने को क्यों हो तैयार ।

कहा सुनों मेरे सरकार ।।

(६ )

मुझको काट लिया है सांप ।

मर जाऊँगा अपने आप ।।

अच्छा होता है उपकार ।

मुझको तुम दोगे जो मार ।।

मेरे संग तेरा उद्धार ।

हो जायेगा करो बिचार ।।

(७)

डाँटा शेर कहीं जा मर ।

क्यों आया तूँ दुष्ट इधर ।।

चालाक मेमना अपने घर ।

पहुँचा शेर गया था डर ।।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ. प्र.) ।

URL: https://sites.google.com/site/skpandeysriramkthavali/

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

BLOG: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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2 blogger-facebook:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं

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