सोमवार, 28 नवंबर 2011

अनुराग तिवारी की सात बाल कविताएँ

 

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इन्‍द्र धनुष

(बच्‍चों की 7 कविताएँ)

प्रार्थना

जो है एक और नाम हज़ार,

जिसकी महिमा अपरम्‍पार,

जिसको कहते हैं ईश्‍वर,

जिसको कहते हैं करतार।

जिसने बनाये ये सागर,

जिसने बनाये ये पर्वत शिखर,

जिसने बनायी ये धरती,

जिसने बनाया ये अम्‍बर।

सृष्‍टि कर्ता जो है जग का,

जो है पालन कर्ता,

करता है जो जग का संहार,

उस ईश्‍वर को नमस्‍कार।

फूल

बगिया को महकाते फूल,

रंग बिरंगे प्‍यारे फूल।

तनिक हवा का मिले इशारा,

इधर उधर लहराते फूल।

कॉँटों में भी रह मुसकाना,

हमको हैं सिखलाते फूल।

सबके मन को रिझा रिझा कर,

हमको हैं सिखलाते फूल।

सबके प्‍यारे तुम बन जाना

मुख से मीठी बोली बोल।

तितली

ना जाने किस देश से आती,

ना जाने किस देश को जाती।

रंग बिरंगी प्‍यारी तितली,

तू है सबके मन को भाती।

इक छोटी सी परी तू लगती,

करती रहती है मनमानी।

तुझे बुलाते देख कर बच्‍चे,

आ जा, आ जा तितली रानी।

हरकारे' पंछी

दूर देश से आते पंछी,

सबका मन बहलाते पंछी।

अपनी मीठी आवाज़ों में,

ना जाने क्‍या गाते पंछी।

देश देश का हाल बताते,

दिन भर इधर उधर मँंडराते,

आसमान में उड़ने वाले,

लगते हैं ‘हरकारे' पंछी।

प्रातः काल

कितने सुन्‍दर फूल खिले हैं,

देखो बच्‍चों बगिया में,

गुन-गुन करते भौंरे उन पर

मँडराते हैं बगिया मेंं।

चिड़ियों ने खोली हैं आँखें,

कलियाँ बदलीं फूलों में,

फैल गया है प्रकाश सूर्य का,

इस अँधियारी दुनियॉँ में।

तारे

सुबह होते ही ये सब तारे,

छिपने कहाँ चले जाते हैं।

रात होते ही फिर ये तारे,

चले कहॉँ से आते हैं।

हमें है लगता ये सब तारे,

सूरज से घबराते हैं।

रात समय ये चंदा से आ,

अपनी व्‍यथा सुनाते हैं।

सरिता

देखो कितनी सुन्‍दर लगती,

सरिता की है धार धवल।

कल कल का संगीत सुनाती,

बहती रहती है अविरल।

कल कल की ध्‍वनि में है इसकी,

जीवन का संगीत बसा।

मानो कहती आगे बढ़ना,
बढ़ते रहना, कभी न रुकना।

--

-सी ए. अनुराग तिवारी

5-बी, कस्‍तूरबा नगर,

सिगरा, वाराणसी- 221010

मो. ः 9415694329

--

संक्षिप्‍त परिचय

नाम ः अनुराग तिवारी

पिता का नाम ः स्‍व. राम प्‍यारे तिवारी

माता का नाम ः स्‍व. सुशीला देवी

जन्‍म तिथि ः 09.05.1970

जन्‍म स्‍थान ः हमीरपुर, उ.प्र.

शिक्षा ः शिक्षा वाराणसी में हुई। काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय से बी. काम. उत्‍तीर्ण

करने के बाद चार्टर्ड एकाउन्‍टेन्‍सी की परीक्षा उत्‍तीर्ण की और तब से बतौर सी. ए. प्रैक्‍टिस कर रहा हूँ।

लेखन ः साहित्‍य के प्रति मेरी रुचि बचपन से ही रही है और तभी से कविताएँ लिखता आ रहा हूँ। मेरी कविताएँ कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।

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