सोमवार, 7 नवंबर 2011

जौली अंकल का व्यंग्य - असली नकली

जैसे ही हवाई जहाज ने दिल्‍ली के एयरपोर्ट की धरती को छुआ तो नटवर लाल ने चैन की सांस लेते हुए कहा कि भगवान तेरा लाख-लाख शुक्र है। अभी नटवर लाल की यह दुआ पूरी भी नहीं हुई थी कि पुलिस वालों ने उसे चारों और से घेर लिया। पुलिस अफसरों ने जैसे ही उसका सामान चैक किया गया उसमें से लाखों रुपये के नकली नोट बरामद हो गये। अगले ही पल उसे सरकारी मेहमान बना कर पुलिस की गाड़ी से जज साहब के सामने पेश कर दिया गया। नटवर लाल को गौर से देखते हुए जज साहब ने पूछा कि तुमने यह नकली नोट क्‍यूं बनाए? नटवर लाल ने हाथ जोड़ कर प्रार्थना करते हुए कहा जज साहब मैंने तो इस बार सारे नोट बिल्‍कुल असली बनाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन न जानें पुलिस वालों को यह किस कमी के कारण नकली लग रहे है। इसी दौरान जज साहब ने अपनी याददाश्त पर थोड़ा जोर डाला तो उन्‍हें याद आया कि नटवर लाल तो पहले भी नकली नोट बनाने के जुर्म में सजा काट चुका है। इससे पहले कि जज साहब कुछ और कहते नटवर लाल ने कहा जी हजूर उस समय तो मेरे से ही नकली नोट बनाने में गलती हो गई थी। मैंने अपनी बीवी की जिद्द को मानते हुए बापू की फोटो लगाने की बजाए अपने बेटे की फोटो लगा दी थी। इससे पहले कि जज साहब नटवर लाल को सजा सुना कर जेल भेजने का आदेश देते, नटवर लाल ने सीने में बहुत जोर से दर्द होने की नौंटकी शुरू कर दी। जज साहब को भी मजबूरन पुलिस वालों को कह कर इसे फौरन अस्‍पताल में भर्ती करने का आदेश सुनाना पड़ा।

अस्‍पताल के बिस्‍तर पर नटवर लाल को लिटाते हुए डॉक्‍टर साहब ने उससे पूछा कि कहां-कहां दर्द हो रहा है? अब असल में कोई तकलीफ तो थी ही नहीं तो नटवर लाल डाक्‍टर साहब को क्‍या बताता कि दर्द कहां हो रहा है? बात को और अधिक उलझाने के मकसद से नटवर लाल ने कहा कि डॉक्‍टर साहब एक जगह दर्द हो तो आपको बताऊं। इसी के साथ नटवर लाल ने चंद नोट डॉक्‍टर साहब की हथेली पर रखते हुए कहा कि आप कुछ देर के लिये पुलिस वालों के सामने अंधे बन जाओ, बाकी सब मैं खुद ही संभाल लूंगा। डॉक्‍टर साहब ने नटवर लाल को कुछ भी उल्‍टा सीधा कहने की बजाए इतनी राय जरूर दे डाली कि यदि वास्‍तव में कोई तकलीफ हो रही है तो किसी अच्‍छे से प्राईवेट अस्‍पताल में इलाज करवाना। हमारे यहां तो दवाईयों से लेकर डॉक्‍टर तक तुम किसी पर भी भरोसा नहीं कर सकते कि कौन असली है और कौन नकली। तुम यहां रह कर कुछ भी करो बस इस बात का ध्‍यान रहे कि मेरी नौकरी पर उंगली नहीं उठनी चाहिए। डॉक्‍टर के चेहरे के हाव-भाव को देखते ही नटवर लाल समझ गया कि यह भी कुछ न कुछ गोरख धंधे की बदोलत ही डॉक्‍टर बना बैठा है, नहीं तो यह आदमी इतनी जल्‍दी चंद रुपयों के लिए अपना ईमान नहीं बेचता।

अस्‍पताल के बिस्‍तर पर लेटे-लेटे नटवर लाल ने सामने पड़ी अखबार उठाई तो उसमें कई चौकानें वाली खबरें छपी हुई थी। कुछ दगाबाजों ने तो नकली इन्‍कमटैक्‍स अफसर बन कर एक गहनों की दुकान को ही लूट लिया था। कुछ ढ़ोंगी कलाकारों के बारे में छपा था कि वो फिल्‍मों में नकली ढाढ़ी मूंछ लगा कर दुनियां को धोखा दे रहे हैं। आजकल तो यहां तक भी देखने में आ रहा है कि कुछ लोग अपनी शक्‍ल और बालों को रंग-रूप बदल कर खुद को डुप्‍लीकेट हीरो हीरोईन की जगह असली की तरह ही पेश करने लगे है। नटवर लाल ने अस्‍पताल में आते जाते मरीजों को बड़ी ही हैरानगी से देखते हुए सोचा कि मैं तो सिर्फ नकली नोटों का कारोबार करता हूं परंतु इस अस्‍पताल में तो कोई नकली टांग लगा कर घूम रहा है, कोई नकली आंख लगवाने आया हुआ है। नकली दांत लगवाने वालों की लाईन तो न जाने कहां तक जा रही थी। जैसे ही नटवर लाल के नकली नोटों के साथ पकड़े जाने की खबर मीडिया में आई तो जज साहब को उसे वहां भेजने का आदेश देना पड़ा जहां से नटवर लाल नकली नोट लेकर आया था।

कहचरी से निकलते हुए नटवर लाल ने हंसते हुए जज साहब से कहा कि बचपन से ही सुनते आये है कि घोड़ी चाहे लकड़ी की हो घोड़ी तो घोड़ी ही होती है। इसी तरह डिग्री असली हो या नकली डिग्री तो डिग्री ही होती है। हमारे मंत्री असली तो क्‍या नकली डिग्री के बिना ही देश की सरकार को बरसों से चला रहे है, उन्‍हें तो कोई कुछ नहीं कहता। हर कोई जानता है कि इन लोगों की बातों में सिर्फ दिखावा और प्‍यार में छलावा होता है। ऐसे लोग जब कभी आसूं भी बहाते है तो वो भी नकली खारे पानी के होते है। आप मुझे अकेले को सजा देकर क्‍या सुधार कर लोगे। इस दुनियां में असल बचा ही क्‍या है सब कुछ नकली ही रह गया है। जिस हवाई जहाज से नटवर लाल को भेजने का प्रबन्‍ध किया गया उसके उड़ने से पहले ही यह मालूम हुआ कि इस जहाज का पायलट भी नकली है। पुलिस की अपराध शाखा ने बताया कि इस पायलट ने जाली दस्‍तावेज जमा करवा कर नकली पायलट का लाइसेंस हासिल किया था।

जौली अंकल का तो यही मानना है कि नकली वस्‍तुओं का व्‍यापार करने वाले चाहे किसी भी भेस में हो एक सभी एक ही थैली के चट्टे के बट्टे हैं। आज यदि हमें पूरी कीमत देकर भी हर चीज नकली मिल रही है तो उसका एक ही कारण है कि हम लोग खुलकर ऐसे दोषियों के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। नकली वस्तुओं का कारोबार करने वालों के मन में मानवता के प्रति कोई दया नहीं होती इसलिये ऐसे लोगों को मानव कहना ही गलत है। हर नकली चीज को असली बना कर अमीर बनने वालों को यह नहीं भूलना चाहिये कि अमीर वो नहीं जिसके पास बहुत धन है या जिसने बहुत धन जमा किया हो। असली अमीर तो वो है जिसे और अधिक धन की जरूरत नहीं रहती। जिसे हर समय धन की भूख रहती हो वो तो सदा निर्धन ही कहलाता है। छल, कपट, बेईमानी और धोखा देकर चाहे कोई लाख कोशिश कर ले लेकिन असली सदा असली और नकली हमेशा नकली ही होता है।

'' जौली अंकल ''

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  1. जौली अंकल का तो यही मानना है कि नकली वस्‍तुओं का व्‍यापार करने वाले चाहे किसी भी भेस में हो सभी "bhains hote hai"

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