बुधवार, 16 नवंबर 2011

ज्योति चौहान की कविता - काश कि होता सब वैसा

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काश कि होता सब वैसा

काश कि वो दिन कभी लौट कर आते
बहाने से सही  उनका  साथ तो हम पा पाते
उनको हमारा और हमें  उनका  ख्याल तो होता
काश कि वो वक़्त रुक जाता वहीं
 उनकीं  बातें लगी, दिल को छूने
हर बात उनकी क्यों लगती सही
मन करता बैठी रहूँ यूँ  ही करीब उनके
फूलों की तरह वो सुंदर, मोर- सा मनमोहक
खिंचने लगी मैं उसकी  ओर
वो महफिलों को खुशनुमा बनाता
हमने उसे  मार्गदर्शक भी चुना
तरसती थी आँखें दीदार को उनके
घंटों उन हसीं लम्हों का इंतज़ार होता
काश कि वक़्त को, मैं रोक पाती

जुदा हुई जब उनसे अचानक
रोता था यह छोटा-सा दिल
हर वक़्त उनके खयालों में डूबा रहता
मन मेरा तब  पराया होने लगा
मिलने  के उनसे बहाने तलाशने लगा
महफिलों में होकर भी तन्हा सी हो गयी

काश कि वो लम्हे, बापस लौट कर आये
काश कि ये, मेरे बस में होता
काश कि वक़्त को, मैं रोक पाती

काश कि कोई लम्हा वो भी याद करे हमें
काश कि मेरा इंतज़ार कुछ तो कम होता
काश कि पहले की ही तरह, मुसकुरा  पाती मैं दोबारा
काश कि उन लम्हों को मैं ज़िन्दगी बना पाती
काश कि कुछ तो मेरे बस में होता
काश कि भुला पाऊं मैं उनको
काश कि कोशिश ये सफल हो
खुदा इसे तो मेरे बस में करना
काश कि होता सब वैसा जैसा चाहता है  इंसान
काश कि होता सब वैसा

ज्योति चौहान
सेक्टर -२२, नॉएडा


परिचय :
नाम: ज्योति चौहान
जन्म स्थान :-डेल्ही ,मूलत: उत्तर प्रदेश की है
जन्म तिथि :- 12.6.1982.
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं, साथ ही रसायन-शास्त्र में  स्नातकोतर,शिक्षा में स्नातक , पुस्तक- विज्ञान तथा सूचना तकनीकी में स्नातक,और कंप्यूटर में पी.जी.डी.सी.ए
व्यवसाय :-  एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हैं . नोएडा में अनुसंधान और विकास विभाग में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं.
 रूचि : सामाजिक सेवा , पढ़ना तथा  कविता , निबंध इत्यादि लिखना
उपलब्धी : स्कूलिंग में कविता ,निवंध इत्यादि तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में पुरुस्कार प्राप्ति, कवितायें प्रसिद्ध समाचार- पत्र , मैगज़ीन, वेब-पत्रिका,वेब-पोर्टल पर प्रकाशित
संपर्क :- ज्योति चौहान ,सेक्टर-२२, sector-22,नॉएडा-२०१३०१


5 blogger-facebook:

  1. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-701:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह सुन्दर क्षणिकाएं...
    सुन्दर रचना...
    सादर बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. aapki rachana parhkar to ham bhi purane dino ki chah karne lage "kash kya ye ho sakta hai"

    उत्तर देंहटाएं

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