शशांक मिश्र भारती की बाल कविता - कर्म का फल

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

कर्म का पथ

सूरज पूरब में उगकर

पश्‍चिम में होता अस्‍त है,

 

सुख-दुख का अटल नियम,

इससे ही होता सत्‍य है,

 

सूर्योदय ही भाग्‍योदय है

भाग्‍योदय ही सूर्योदय है,

 

जो भाग्‍य के सहारे जीते हैं

जीवन में कुछ न पाते हैं,

 

तरह-तरह की इच्‍छायें

मन में रखे रह जाते हैं,

 

इसीलिए हे प्‍यारे बच्‍चों

मन में दृढ़ विश्‍वास जगाओ,

 

छोड़ सभी निराशाओं को

कर्मवीरों सा पथ अपनाओ।

 

सम्‍पर्कः-हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर 242401 उप्र

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

3 टिप्पणियाँ "शशांक मिश्र भारती की बाल कविता - कर्म का फल"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.