मंगलवार, 22 नवंबर 2011

जयप्रकाश मिश्र की हास्य व्यंग्य कविता - हवाले से

हवाले से

मैं एक प्रिंसिपल के हवाले से लिख रहा हूँ

परीक्षा के दौरान

किसी के पास

नक़ल सामिग्री नहीं होनी चाहिए

वही लिखना

बोला जाये कक्ष -निरीक्षक के द्वारा

 

मैं एक नेता के हवाले से लिख रहा हूँ

देखो

भनक नहीं लगने देना

कत्ल करना है एक बड़बोले आदमी का

 

मैं एक वकील के हवाले से लिख रहा हूँ

दो लाख लगेंगे

तो बच सकती है उम्रकैद की सजा

घूम सकते हो आज़ाद

 

मैं किस -किस के हवाले से लिखूं

बना रहना है मुझे भी सामाजिक और मिलनसार

हवाला दिया अगर

पेशेवर आलोचकों और कलम के धुरंधरों का

जाहिर है मैं बड़ा कवि नहीं बन सकता .

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परिचय- युवा कवि एवं गज़लकार .जन्म- २७मार्च १९८८.दैनिक जागरण ,सन्डे पोस्ट ,उत्तर प्रदेश आदि पत्रिकाओं में कवितायें प्रकाशित.

   -  जयप्रकाश मिश्र

ग्राम -बिजौरी ,पोस्ट -गुठिना ,जिला -फर्रुखाबाद -(उत्तर प्रदेश)-205302

 

         ईमेल -                 mishrajayprakash262@gmail.com

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