मंगलवार, 15 नवंबर 2011

मीनाक्षी भालेराव के दो गीत

image

गीत

घन

घन तो बरस,बरस बरसे

अम्बर से जैसे अमृत बरसा

लहराया सावन खेतों में

सोने सा चमका खलियान

पीली-पीली सरसों से इस बार

आने को है खुशियों के त्यौहार

धरती का घूंघट खुलने को तरसे

हरी चुनरिया ओढ़ क्यारी-क्यारी

फूलों और फलों से सझी किनारी

सोला श्रृंगार किया धरती ने

बाहें पसारे खड़ा है अम्बर

मानो नन्ही-नन्ही बूंदों का

कोमल सा स्पर्श लिए खेतों में

उतर आया है सावन

प्रेम की बौछार लिए

 

बरखा

बरखा तो बरसे

दिल मोरा तरसे

आई ये केसी बहार रे

सावन की पहली फुहार रे

हम तो जलने लगे

हम तडपाने लगे

है ये कैसी आग रे

सावन की पहली फुहार रे

अश्क बहते रहे

दिल तडपता रहा

है ये कैसी तलाश रे

सावन में पिया मिलन की आस रे

तन्हा मैं तो रही

तन्हा मैं तो जली

तन भीगे मन भिगेना

है ये कैसी प्यास रे

सावन की पहली फुहार रे

आई ये कैसी बहार रे

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------