धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - फल और डालियाँ

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फल और डालियाँ

जब से

फलों से लदी हुई डालियों ने

झुकने से मना कर दिया

फलों ने

झुकी हुई डालियों पर लगना शुरू कर दिया

अब कहावत बदल चुकी है

आजकल जो डाल

जितना ज्यादा झुकती है

वो उतना ही ज्यादा फलती है
सादर
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह
वरिष्ठ अभियन्ता (जनपद निर्माण विभाग - मुख्य बाँध)
बरमाना, बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश
भारत

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com फतुहा पटना की कलाकृति)

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1 टिप्पणी "धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - फल और डालियाँ"

  1. सुंदर रचना के लिए,..धर्मेन्द्र जी को बधाई,..
    इस पोस्ट के रविजी,आपको आभार,//

    उत्तर देंहटाएं

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