मंगलवार, 29 नवंबर 2011

अनन्‍त आलोक की लघुकथा पत्‍नी की जरुरत

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बाबू राम लाल जी की रिटायरमेंट में अभी एक वर्ष था कि अचानक उनकी पत्‍नी की ह्रदयघात मृत्‍यु हो गई। बाबू को अभी इकलोते पुत्र का विवाह करना था जो पत्‍नी ने अपने जीवन काल में ही निश्‍चित कर दिया था। लगभग एक वर्ष में पुत्र का विवाह तथा बाबू राम लाल की रिटायरमेंट हो गई। जीवन साथी के अचानक यूं चले जाने से एक बार तो उन्‍हें गहरा आघात लगा था लेकिन इन व्‍यस्‍तताओं के चलते यह बात उनके मानस पटल से मानो विस्‍मृत सी हो गई थी।

सब ठीक ठाक चल रहा था फिर कुछ समय बाद न जाने क्‍यों बाबू के मन में पुनर्विवाह का भूत सवार हो गया और उपयुक्‍त वधु की तलाश में कभी यहां तो कभी वहां भटकने लगे। बने बनाये घर के टूटने के भय से आशंकित जवान पुत्रियों तथा शादी शुदा पुत्र ने पिता को समझाने के अथक प्रयास किए, बच्‍चों ने लगभग आठ वर्ष तक अपने बूढे़ पिता को पुनर्विवाह से रोके रखा लेकिन नियती के आगे भला किसकी चलती है। आखिर बाबू राम लाल को पुनर्विवाह करने पर ही शान्‍तिं मिली।

इस बात से खिन्‍न पुत्र ने पिता को जी भर खरी खोटी तो सुनाई ही साथ ही मां को खोने का गम सीने में दफनाए पुत्र, पिता के खोने के भय से आशंकित, और परेशान हो उठा। पुत्र लगभग डिप्रेशन का शिकार होने को था कि गांव का एक रिटायर्ड बुजुर्ग घर पर आया जो इस सारी दुर्घटना से वाकिफ था। ''बेटा परेशान होने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं, जो होना था हो गया, अच्‍छा! क्‍या तुम जानते हो आदमी को पत्‍नी की सबसे अधिक जरुरत कब होती है ? .......................

जब वह रिटायर हो जाता है! क्‍योंकि उस समय उसके पास न तो कोई बैठने वाला होता है और न ही उसकी बात सूनने वाला। काम कुच्‍छ होता नहीं है इसलिए तनहाई काटने को दोड़ती है।'' बुजुर्ग ने समझाते हूए कहा। ''जी चाचा जी'' परेशान पुत्र बस इतना ही कह पाया, चाचा की सीख ने जाने क्‍या जादू किया कि सारी परेशानी दूर हो गई और पुत्र ने हालात से खुशी खुशी समझोता कर लिया।

अनन्‍त आलोक

anant alok1@gmail.com

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com फतुहा पटना की कलाकृति)

6 blogger-facebook:

  1. लघुकथा के प्रकाशन के लिए श्रधेय श्री रवि रतलामी एवं सुंदर रेखांकन के लिए श्रधेय श्री अमरेन्द्र जी का हार्दिक आभार |

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  2. shobha rastogi shobha9:30 pm

    anant ji badhaee.. samay ke sath insan ki jaroorat bhi badalti hai ......aadmi ko patni ki jaroorat hoti hai vridhavastha me .. thik hai ...kintu kya aadmi ke jaane ke bad vahi jaroorat aurat ko nahi hoti kya ? .. aurat to aisa nahi karti ... apne samay ko ham kaise dhalte hai .. yah ham par bhi nirbhar karta hai ... rachna sarthak hai ..

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  3. कितना सही परिभाषित किया है इस रिश्ते को. वाकई जरुरत ही रिश्तों को जन्म देती है.

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  4. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  5. मैडम शिखा जी , सदा जी एवं मैडम शोभा जी का हार्दिक आभार |

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