सोमवार, 14 नवंबर 2011

गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर की कविता - चाचा नेहरू तुम्हें नमन

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खून पसीने के गारे से भरी नींव सारी थी जिसने,

नये देश के नये भवन की नई नींव डाली थी जिसने

बापू के सपनों के तारे उस चमकीले ध्रुव को

बड़े मान से हृदय बसाया चाचा कहकर जग ने

गंगा लहर-लहर गाती है कजरी, गीत, भजन,

पंडित नेहरू तुम्हें नमन है चाचा तुम्हें नमन।।

 

तुम गौरव थे भारत मां के, हुए सपूत निराले

दुर्दिन के बादल सब छाँटे, पथ के शूल निकाले,

सूरज बनकर चमके दिन में, बने चाँद रजनी में

और, धरा पर फूल बिछाकर चुपके गये विदा ले।

भरे सुगंधित मलय पवन की मोहक मधुर छुवन,

पुलक-पुलक फसलें हरसाती, लहराते तन-मन।।

 

तुम बच्चों के प्यारे चाचा, बच्चे तुम्हें दुलारे,

हर संकट में दौड़े उनके, जब-जब तुम्हें पुकारे।

उन गुलाब से शिशुओं को तुम दिल से सदा लगाए

काँटे फूल बनाए सारे, फिर फूलों से हारे।

उसी हार से आज तुम्हारा करके अभिनंदन,

चरणचूम, आशीष शीश धर, करते शिशु वंदन।

 

गीत गज़ल है नाम तुम्हारा, देह तुम्हारी छंद,

मधुर मंद मुस्कान तुम्हारी मंगलमयी प्रबंध।

झरने जैसी धवल मनोहर वाणी के उद्गाता

‘गीता’ हैं सब ग्रंथ तुम्हारे भाषण ललित निबंध।

जिनको गोद खिलाया तुमने वही महान सुवन।

आग लगाकर ताप रहे हैं, तेरा चंदन-वन।

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