शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

रघुनंदन प्रसाद दीक्षित 'प्रखर' का आलेख - उतार चढ़ाव की साहित्‍यिक यात्रा : वर्ष 2011

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डॉ. रघुनंदन प्रसाद दीक्षित 'प्रखर'

उतार चढ़ाव की साहित्‍यिक यात्रा : वर्ष 2011

वर्ष 2011 इसलिए विलक्षण कहा जा सकता है क्‍योंकि इस वर्ष हिन्‍दी साहित्‍य के इतिहास में प्रथम बार एक साथ सात महान विभूतियां की जन्‍म शताब्‍दियों का वर्ष रहा, जिनमें कवि,कथाकार, लेखक, कलाविद और संगीतज्ञ शामिल हैं। इन साहित्‍य पुरोधाओं ने अपने कालखण्‍ड में हिन्‍दी साहित्‍य को अनेकों कालजयी रचनाओं से समृद्ध किया ,साथ ही समाज एवं रचनाधर्मियों को एक नई दिशा दी। इन साहित्‍य पुरोधाओं में राष्‍ट्रीय चेतना के कवि गोपाल सिंह नेपाली,सरस कवि गीतकार शमशेर बहादुर सिंह जनकवि बाबा नागार्जुन,शायर फैज अहमद फैज,उत्‍कष्‍ट चिंतक अज्ञेय, मध्‍यवर्गीय परिवार की मनःस्‍थिति को उकेरने वाली तौलिए जैसी अनेकों कहानियों,विषयों पर गद्य लेखन करने वाले शिल्‍पकार उपेन्‍द्र नाथ अश्‍क,केन नदी के किनारे एकांत साधना में लीन केदार नाथ अग्रवाल शामिल हैं। जन्‍म शताब्‍दियों के कारण इस वर्ष पूरे देश में इनके आयोजनों ,गोष्‍ठियों तथा सम्‍मेलनों की धूम रही। साहित्‍य प्रमियों एवं समर्थकों ने अपने स्‍तर से ही यह आयोजन किए परन्‍तु इस तरफ केन्‍द्र अथवा राज्‍य सरकारों की उदासीनता ही रही। इस उदासीनता का क्‍या कारण रहा यह चिन्‍ता और शोध का विषय हो सकता है।राष्‍ट्र के सामने सवाल यह है कि क्‍या साहित्‍यकारों का वजूद सिर्फ उनके जीवनकाल में पुरुस्‍कारों और सम्‍मानों तक ही सीमित है अथवा इससे आगे भी कुछ.....?

यहां राग दरबारी के शिल्‍पकार स्‍व.श्रीलाल शुक्‍ल एवं कथाकार अमर कांत को मिले ज्ञानपीठ पुरुस्‍कार की चर्चा समीचीन होगी। पुरुस्‍कारदायी संस्‍थान के पास ऐसा कौन सा तराजू या आला था अथवा चयनकर्ताओं ने कौन से सूत्र प्रयोग किया कि पुरुस्‍कार की राशि दोनों विभूतियों में बराबर तक्‍सीम कर दी। जबकि दोनों ही साहित्‍यकार अपने अपने क्षेत्र में स्‍थापित है।वस्‍तुतः दोनों ही विभूतियां अलग अलग सम्‍मान की अधिकारी थे। क्‍या उन काली भेडों को ढूंढने में समर्थ होगा कालखण्‍ड.......?

राष्‍ट्रीय क्षतिः- इस कालखण्‍ड में साहित्‍य, संगीत तथा कला से सम्‍बद्ध आधार स्‍तम्‍भों का अवसान इस वर्ष राष्‍ट्र की आंखें नम कर गया। जिनमें असमिया लेखक,कवि एवं संगीतज्ञ भूपेन हजारिक ,असमिया लेखिका इन्‍दिरा गोस्‍वामी,संगीतज्ञ पं. भीमसेन जोशी, फणीश्‍वर नाथ रेणु की पत्‍नी लतिका रेणु,ख्‍यात आलोचक प्रो. कमला प्रसाद मराठी लेखक विनायक आदिनाथ समाचार वाचक विनोद तिवारी, आचार्य जानकी बल्‍लभ शास्‍त्री, चित्रकार हुसैन, चिली में निर्वासित कवि गोंजालो रोलास तथा वरिष्‍ठ पत्रकार कस्‍तूरी रंजन सम्‍मलित हैं। राष्‍ट्र का इन पुण्‍यात्‍माओं को कोटिशः नमन।

प्रकाशनः- इस वर्ष हालांकि अनेक पुस्‍तकों का का प्रकाशन हुआ । जिनमें से कुछ निम्‍नवत हैं-

बारहखडी-सं. महेश दर्पण एवं विजय श्रीवास्‍तव,अनाशक्‍ति दर्शन-सं. मणिमाला,बेचेहरगी-शायर भारत भूषण,युग तेवर -सं. कमल नयन पाण्‍डेय,चाणक्‍य और चन्‍द्र गुप्‍त-राजेन्‍द्र पाण्‍डेय,फिलस्‍तीन और अरब -इज्रराइल संघर्ष-महेन्‍द्र मिश्र,छब्‍बीस कहानियां-विजयदान देता,इतिहास के सवाल-नन्‍द किशोर आचार्य ,ओसामा का अंत-राज कुमार सिंह,नारकीय-मुद्राराक्षस, नया सवेरा-डा. मीरा रामनिवास के अतिरिक्‍त धरती आब,मदरसा, दादी की मुस्‍कान, खुद बदलें अपनी किस्‍मत, रामचरित मानस संदर्भ समग्र आदि शामिल हैं।

साहित्‍यिक हलचलः- साहित्‍यिक हलचलों में निम्‍न गतिविधियां रहीं

1- पूवोत्‍तर हिन्‍दी अकादमी द्वारा आयोजित वार्षिक समारोह एवं गांधी चर्चा कार्यक्रम।

2- सरिता लोकभारती साहित्‍य सम्‍मान समारोह एवं राष्‍ट्रीय कवि सम्‍मेलन।

3- तुलसी सम्‍मान समारोह(भोपाल)।

4- विक्रमशिला हिन्‍दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) का उज्‍जयनी में 16वां दीक्षांत समारोह।

इसके साथ ही वर्षांत होते होते फर्रुखाबाद महोत्‍सव में आयोजित सांस्‍कृतिक,साहित्‍यिक,गोष्‍ठी एवं राष्‍ट्रीय कवि सम्‍मेलन मृदुल अनुभूति दे गया।

समग्रतः 2011 पूर्णतः प्राप्‍त करते करते उतार चढाव खटटे मीठे और तक्‍त अनुभूतियां दे गया और दे गया नववर्ष के आगमन की आहट का शुभ संदेश....................

शांतिदाता सदन,

नेकपुर चौरासी

फतेहगढ (उ.प्र.) पिन - 209601

E- Mail- Dixit48.3@rediffmail.com

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