सोमवार, 5 दिसंबर 2011

‘अनुरंजिका' और ‘कवितायें विज्ञान की' पुस्‍तकों का लोकार्पण

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कवि एवं बाल साहित्‍यकार सन्‍तोष कुमार सिंह की दो पुस्‍तकों - ‘अनुरंजिका' और ‘कवितायें विज्ञान की' का लोकार्पण आलोक पब्‍लिक स्‍कूल,पंचवटी कालौनी, मथुरा के सभागार में बड़े गरिमामयी वातावरण में सम्‍पन्‍न हुआ। मुख्‍य अतिथि डा0 इन्‍द्र सेंगर, अध्‍यक्ष डा0 अनिल गहलौत, विशिष्‍ट अतिथि डा0 प्रदीप गुप्‍त एवं श्री हरीशंकर राघव द्वारा दीप प्रज्‍ज्‍वलित और माँ शारदे के चित्र पर माल्‍यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्‍भ हुआ। इसी क्रम में डा0 अनिल गहलौत ने स्‍व0 आलोक प्रताप सिंह के चित्र पर माल्‍यार्पण कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

कवि सन्‍तोष कुमार सिंह के कृत्तित्‍व पर प्रकाश डालते हुए डा0 इन्‍द्र सेंगर ने कहा कि ये माटी से जुड़े हुए कवि हैं। इनकी कविताओं में कल्‍पनाओं की भरमार नहीं मिलती। समाज में फैली कुरीतियों, विदेशी कुसंस्‍कृति, नैतिक पतन और राजनैतिक विसंगतियों को अपनी कविताओं में वास्‍तविक रूप में उकेर कर मानव को जागरूक करते हैं। लोकार्पित पुस्‍तक ‘अनुरंजिका' भी इन्‍ही बातों को साकार करने वाली कृति है। अध्‍यक्ष डा0 अनिल गहलौत ने कहा कि श्री सन्‍तोष कुमार सिंह साहित्‍य की विभिन्‍न विधाओं में श्रेष्‍ठ सृजन कर रहे हैं। गीत, बालगीत, कहानी, हाइकु एवं हस्‍य व्‍यंग्‍य विधाओं में लिखने वाले यह सिद्धहस्‍त कवि हैं। इनकी बाईसवीं पुस्‍तक ‘कवितायें विज्ञान की' एक अनूठी कृति है। इसमें भौतिक विज्ञान की विभिन्‍न परिभाषाओं को बड़े ही सहज एवं सरल तरीके से समझाया गया है।

गीत संग्रह ‘अनुरंजिका की समीक्षा डा0 रमाशंकर पाण्‍डेय और ‘कवितायें विज्ञान की' पुस्‍तक की समीक्षा डा0 दिनेश पाठक शशि ने साहित्‍यकारों और उपस्‍थित साहित्‍य प्रमियों के समक्ष प्रस्‍तुत कीं।

कार्यक्रमके अगले चरण में नगर के तीन विद्वान साहित्‍यकारों का सम्‍मान ‘आलोक प्रताप सिंह मैमोरियल श्‍ौक्षणिक एवं सॉस्‍कृतिक समिति की ओर से, प्रबन्‍ध निदेशक जितेन्‍द्रसिंह सेंगर एवं मुख्‍य अतिथियों द्वारा शाल उढ़ाकर, नारियल एवं सम्‍मान पत्र भेंट कर सम्‍मानित किया। सम्‍मानित साहित्‍यकारों के नाम क्रमशः डा0 ओम शिवराज, डा0 कन्‍हैयालाल पाण्‍डेय तथा श्री मदनमोहन उपेन्‍द्र हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय कवि सभा दिल्‍ली के महामंत्री डा0 प्रदीप गुप्‍त ने हिन्‍दी साहित्‍य सृजन में सराहनीय योगदान के लिए श्री सन्‍तोष कुमार सिंह को भी सम्‍मान पत्र भेंट कर सम्‍मानित किया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कवि सम्‍मेलन का शुभारम्‍भ अशोक अज्ञ ने माँ शारदे की वन्‍दना पढ़ कर किया। इसके बाद दिल्‍ली से पधारे कवि प्रदीप गुप्‍त ने हस्‍य कविता पढ़कर सभी को हँसने पर मजबूर कर दिया। फिर दूसरी रचना में नौजवानों को जाग्रत करते हुए कहा -

दिल मेरा नर्म है, खूं मेरा गर्म है, देश आगे बढ़े, यें मेरा कर्म है।

नौजवानो जागो, सूर्य ढलने लगा, राष्‍ट्र ही धर्म है, यही मर्म है॥

डा0 रमाशंकर पाण्‍डे ने भ्रूण हत्‍या को जघन्‍य अपराध बताते हुए बिटियों के लिए मार्मिक कविता पढ़ी -

घर में उजाला सी लगेगीं यहाँ बेटियाँ।

मन की निगाहों से ही मन में निहार लेना,

मन में शिवाला सी लगेगीं यहाँ बेटियाँ॥

डा0 के0उमराव विवेकनिधि ने बच्‍चों के लिए अपने उदगार यूँ व्‍यक्‍त किए -

बच्‍चे मन के सच्‍चे, सारी दुनिया की तकदीर हैं।

भेदभाव से ओझल प्‍यारी, ममता की तसवीर हैं॥

कवि लक्ष्‍मीचंद मयंक ने मुक्‍तक सुनाते हुए कहा-

रच गई ‘अनुरंजिका' भी लोक अर्पण के लिए,

ये शमाँ बनकर सुहानी आज जनमन छा रही।

दिल्‍ली से पधारे कवि डा0 इन्‍द्र सेंगर ने सस्‍वर मार्मिक गीत पढ कर श्रोताओं की वाह-वाही लूटी -

तुमने मुझको कहाँ न देखा,

उदयाचल की कनक किरण में,

प्राची के रक्‍तिम अधरों में,

लेकिन मैं मानस की गहराई में था॥

संयोजक सन्‍तोष कुमार सिंह ने भ्रष्‍टाचार और दुश्‍चरित्र में फँसे राज नेताओं पर कटाक्ष करते हुए हास्‍य-व्‍यंग्‍य रचना पढ़कर वाहवाही लूटी -

देश की जनता करे कमाई।

वे खाते थे दूध मलाई।

अब तिहाड़ की दाल खा रहे,

रख लोहे के थाल में।

फँसा चिरौटा जाल में॥

गजलकार डा0 अनिल गहलौत ने बहुत ही अच्‍छी गजल पढ़कर श्रोताओं का दिल जीता -

खड़ी है फौज भ्रष्‍टाचारियों की, इससे लड़ने को,

हजारों चाहिए अब तो अन्‍ना हजारे भी।

इनके अतिरिक्‍त आर0 के0 भारद्वाज, हरीसिंह पहलवान, मोहन मोही, डा0 सन्‍त शरण शर्मा, कन्‍हैयालाल पाण्‍डेय, चन्‍द्र प्रकाश शर्मा, वृन्‍दावन दास पांड्‌या, डा0 धरम राज, टीकेन्‍द्र शाद, डा0 सरोज अग्रवाल, मदनमोहन अरविंद, डा0 दिनेश पाठक तथा अन्‍य कवियों ने भी कवितायें प्रस्‍तुत कर श्रोताओं का मन मोहा। इस कार्यक्रम में ब्रजभूषण वर्मा, डा0 महेन्‍द्रसिंह, सुन्‍दरसिंह चौहान, प्रभूनाथ मिश्र, के0 जे0 बानवा, कैप्‍टेन बहादुर सिंह, एस0एस0मिश्रा, सत्‍यवीरसिंह, श्‍यामसुन्‍दर तोमर, श्रीमती चन्‍द्रा तथा स्‍कूल की शिक्षिकायें एवं छात्र-छात्रायें भी मौजूद थे।

प्रेषक - सन्‍तोष कुमार सिंह, मोतीकुंज एक्‍शटेन्‍शन मथुरा।

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