बुधवार, 7 दिसंबर 2011

रघुनंदन प्रसाद दीक्षित प्रखर की लघुकथा और कन्नौजी गीत

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(कन्‍नौजी राष्ट्र प्रेम गीत)

चुनरिया रंगाय देओ

चुनरिया रंगाय देओ ,पिया तीन रंग की ।

ओढै हैं सखी सारी ,सैंया जी संग की॥

 

केसरिया रंग पिया ,वीरन नै डारो।

बलिदानी आभा सोहै, छजै रंग न्‍यारो॥

 

छम-छम पायलिया बजै ,

ताल हो मृदंग की॥ चुनरिया............

श्‍वेत रंग सादगी ,रहऔ अमन चैन सों।

द्वेष तजौ प्रीत रखौ ,रस झरै बैन सों॥

 

सरसै फलवारी ,सजन

मन गूंज हो उमंग की॥ चुनरिया............

धानी रंग धान्‍य भरे ,पिय प्रभुता बहार होय ।

पढैं लिखैं शिखर छुऐं,नदिया सी धार होय॥

 

हिल मिल त्‍योहार मनैं

होरी हुडदंग की॥ चुनरिया..........

नील चक्र बीच सजै, चौबिस हों तीलियाँ ।

नित्‍य बढैं नित्‍य फलैं,उखाड दें कीलियाँ ॥

 

चुनरिया मोय भाय 'प्रखर'

बात ना छल छंद की॥

 

(लघु कथा)

हुनर की कीमत

रहमत चचा कई दिन से मकान बनाने की जुगत में लगे थे। बालू रेत ईंट गिट्‌टी इकट्‌ठा करने में दिन रात एक किए हुए थे।काम ज्‍यादा,वक्‍त कम, इसी फ्रिक में दूभर हुए जा रहे थे।इधर बेगम की चखचख भी परेशान किए थी।परेशानी का सबब था उनकी कंजूसी।रहमत मियां के पास खुदा का दिया वह सब कुछ था,जो सुकून की जिन्‍दगी जीने के लिए काफी था,लेकिन सब्‍जी मण्‍डी में भाव ताव हो,रिक्‍श्‍ो से कालेज जाना हो या फिर रामलीला कमेटी का चंदा हमेशा अधेली में चार चवन्‍नी करने की आदत थी। इसी के चलते रहमत मियां को बेगम से कभी-कभी खरी खोटी सुननी पडती थी।

परेशान मियां रहमत मकान बनवाने के इरादे से झल्‍लन मिस्‍त्री के पास गये और फरमाया-‘‘ अरे भई झल्‍लन मियां........अमां मकान बनवाना है,क्‍या मजदूरी लोगे ?‘‘

‘‘हुजूर जो आजकल चल रही है दे देना।‘‘ झल्‍लन ने अर्ज किया ।

‘‘अरे भई कुछ तो होगी मैं भी तो जानू ।‘‘ रहमत मियां ने जानने की गरज से पूछा।

‘‘मालिक तीन सौ रुपये‘‘ झल्‍लन ने सपाट उत्‍तर दिया ।

‘‘तीन सौ रुपैया‘‘ रहमत मियां चौंके ।बडबडाते हुए बोले-‘‘अमां यार अंधेर हो गया ,करोगे क्‍या?.........एक ईंट सीधी और दूसरी आडी रखना है उसके तीन सौ रुपैया, लाहौल बिला....। यह काम तो मैं भी कर सकता हूँ।

‘‘हाँ...... हाँ मालिक आप बजा फरमाते हैं ,पहले कौन सी ईंट रखना है पैसे उसी लेता हूँ।‘‘ झल्‍लन मियां ने अपना जुमला पूरा किया-‘‘यह हुनर की कीमत है।

--

रघुनंदन प्रसाद दीक्षित 'प्रखर'

सम्‍पादक , प्रंजल प्रवाह

शांतिदाता सदन, नेकपुर चौरासी फतेहगढ (उ0प्र0) पिन209601

E Mail-Dixit4803@rediffmail.com

1 blogger-facebook:

  1. बहुत सुंदर प्रखर जी गीत और लघुकथा तो क्या कहने ...मनोरंजक |

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