मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

जयप्रकाश मिश्र की अन्ना को समर्पित कविता

अन्ना को समर्पित कविता -
 
   चर्चित
चर्चा नहीं होती छोटी - मोटी घटनाओं की
छोटी - मोटी घटनाएँ
खो जाती हैं
बड़े - बड़े हादसों के जंगल में
 
चर्चा नहीं होती
माफियाओं के इलाके में किसी टपोरी की
जैसे घनघोर तूफ़ान में
उखड़ जाते हैं बादलों के पांव
 
चर्चित नहीं होते हाँ - हुजूरी करने वाले
चर्चित नहीं होते कतार में
पीछे चलने वाले
जैसे बल्ब की रोशनी में
चर्चित नहीं होता दिया
 
जैसे सर्दिओं में आग.......
रेगिस्तान में पानी
उसी तरह चाटुकारों की सभा में
उठा लेता जो विद्रोह की कमान
चर्चित हो जाता है .
 
 
जयप्रकाश मिश्र
mishrajayprakash262@gmail.com
 
ट्विटर पर जयप्रकाश - jayprakashmish1

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