मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

जयप्रकाश मिश्र की अन्ना को समर्पित कविता

अन्ना को समर्पित कविता -
 
   चर्चित
चर्चा नहीं होती छोटी - मोटी घटनाओं की
छोटी - मोटी घटनाएँ
खो जाती हैं
बड़े - बड़े हादसों के जंगल में
 
चर्चा नहीं होती
माफियाओं के इलाके में किसी टपोरी की
जैसे घनघोर तूफ़ान में
उखड़ जाते हैं बादलों के पांव
 
चर्चित नहीं होते हाँ - हुजूरी करने वाले
चर्चित नहीं होते कतार में
पीछे चलने वाले
जैसे बल्ब की रोशनी में
चर्चित नहीं होता दिया
 
जैसे सर्दिओं में आग.......
रेगिस्तान में पानी
उसी तरह चाटुकारों की सभा में
उठा लेता जो विद्रोह की कमान
चर्चित हो जाता है .
 
 
जयप्रकाश मिश्र
mishrajayprakash262@gmail.com
 
ट्विटर पर जयप्रकाश - jayprakashmish1

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------