रविवार, 11 दिसंबर 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविता

किस कारण चुपचाप जुर्म ये हम सब सहते जाते हैं

बमुश्किल व बड़ी मशक्कत से बच्चे पल पाते हैं
लोग फिरौती के लालच में उन्हें उठा ले जाते हैं।

कहीं दूर सूने स्थल में उन्हें छुपा कर रख देते
और सूचना देकर लंबी मोटी रकम मंगाते हैं।

कभी फिरौती न मिलने पर धमकी देते देते ही
बड़े बेरहम बेदर्दी से उनका कत्ल कराते हैं।

जिनको कोई काम नहीं है ऐसे निर्दय लोग यहां
यही काम करते रहते रहते हैं यही काम करवाते हैं।

जन का खून हुआ क्यों पानी क्यों जनपद निष्कंप हुये
किस कारण चुपचाप जुर्म ये हम सब सहते जाते हैं।

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