शनिवार, 17 दिसंबर 2011

नागेश पांडेय 'संजय' का बालगीत - धूप न निकली आज

नागेश पाण्डेय
धूप न निकली आज
धूप न निकली आज,
कहीं बीमार तो नहीं?

सुबह-सुबह आ जाती थी,
इतराती-इठलाती थी,
माखन बन मुस्काती थी,
मिसरी बन शरमाती थी।

कभी आग बरसाती थी,
जो हो, मन को भाती थी।
किए बेतुके काज,
मगर हर बार तो नहीं।

कैसी कारस्तानी है,
क्यों की आनाकानी है?
ये इसकी मनमानी है,
गढ़ी हुई शैतानी है,
शैतानी बचकानी है,
या फिर और कहानी है?
मिली सूर्य से डाँट,
और फटकार तो नहीं?

धूप न निकली आज
कहीं बीमार तो नहीं।
---
- डॉ. नागेश पांडेय 'संजय'
निकट रेलवे कालोनी ,
सुभाष नगर,
शाहजहाँपुर- 242001.
(उत्तर प्रदेश, भारत)

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5 blogger-facebook:

  1. wah bahut shaandar chinta h dhoope baare kyu nahi aayi

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  2. wah kya kahne aapne shaandaar tarike se dhoop ki chinta ki h

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी कविता लगी आपकी. सूरज और धूप के माध्यम से आपने मौसम को बताने का प्रयास किया है, जो सफल हुआ है. मुझे अच्छी लगी आपकी कविता.

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी कविता लगी आपकी. सूरज और धूप के माध्यम से आपने मौसम को बताने का प्रयास किया है, जो सफल हुआ है. मुझे अच्छी लगी आपकी कविता.

    उत्तर देंहटाएं

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