बुधवार, 7 दिसंबर 2011

पुरूषोत्तम व्यास की कविता - मुस्कान

 

image

मुस्कान

अधरों के छोटे-से घरोंदे मे जो रहती,

अति-सुंदर सी मन को हर्षित करती,

बहुत शर्मिली-सी होती-मुस्कान ।

 

मुस्कानों-से जीवन चलता,

पथिक को अपना-पथ प्यारा लगता

संग छुटा-सबका

तुम्हारा मधु-सा संग न छूटा

पतझड़ से इस जीवन मैं

सुखद-सा एहसास करा जाती

लगती जैसे तितली-

बगिया-बगिया खुशियाँ बिखेरी थी ।

 

हर मोड़ पर जीवन के

तुमकों –ही अपना-सा पाया

प्यार जिसके ह्दय में

ढूढ़ लेगा वह-तुमकों

प्रकृति के हर-पुष्प पर,

तुम्हारी ही महक आयेगी ।

 

चंचल-चपल नयनों में,

काजल-संग तुम रहती हो,

संन्यासी के गांव में,

प्रणय-समीर बन बहती-हो

        ...... मुस्कान ।

--

ई-मेल pur_vyas007@yahoo.com

 

झामनानी निवास

डा.फजल के बाजू

क्वेटा कालोनी

नागपुर

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------