शनिवार, 31 दिसंबर 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की नव-वर्ष शुभकामना कविता


मदिर मस्ज़िद गुरुद्वारों में क्यों अरदास न करते
कुमकुम पुष्प अगरबत्ती से
क्यों न स्वागत करते
नये वर्ष की नव चौखट पर
क्यों न दीपक धरते?

नया साल आनेवाला है
खुशी खुशी चिल्लाते
हँसते हँसते शाम ढले
मदिरालय में घुस जाते

विहस्की और बियर रम में ही
नया वर्ष दिखता है
कौड़ी दो कौड़ी में कैसे
प्रजा तंत्र बिकता है

मंदिर मस्ज़िद गुरुद्वारों में
क्यों अरदास न करते
नये वर्ष की नव चौखट पर
क्यों न दीपक धरते?

चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा
नया वर्ष अपना है
किंतु अपना नया वर्ष तो
जैसे एक सपना है

नई हवा की चकाचौंध में
हम अपने को भूले
हमको तो अच्छे लगते अब
पश्चिम के घर घूले

क्यों न घंटे शंख बजा
भारत मां की जय कहते
नये वर्ष की नव चौखट पर
क्यों न दीपक धरते?
--

3 blogger-facebook:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति..
    आपको सपरिवार नववर्ष २०१२ की हार्दिक शुभकामनायें..

    उत्तर देंहटाएं
  2. Prabhudayal11:58 am

    Apko bhi shubh kamnayen Prabhudayal

    उत्तर देंहटाएं

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