शनिवार, 31 दिसंबर 2011

शशांक मिश्र भारती की नव-वर्ष कविता

नववर्ष की सार्थकता

नया वर्ष

ले नूतन हर्ष

प्रतिवर्ष आता

जगाता नयी उमंगें

हर्षोंल्‍लास की तरंगें,

बीते क्षणों की स्‍मृति

करवाने को-

त्रुटियों का पश्‍चाताप।

 

शायद-

यह सब सत्‍यनिष्‍ठा से होता

मात्र हैप्‍पी न्‍यू ईयर कहने

ग्रीटिंग भेज देने

कलैण्‍डर बदल देने तक

न सिमटता,

शेष वैसा ही वर्ष भर

हत्‍या, अपहरण, बलात्‍कार का ताण्‍डव

मनुज पर दानवी वृत्तियों का प्रभाव

प्रकृति की त्रासदियां;

 

यदि हम परिवर्तन कर

स्‍व मन मस्‍तिष्‍क को

दानवीवृत्तियों को नष्‍टकर

प्रकृति मानव में सामंजस्‍य स्‍थापित कर

हृदय में स्‍नेह, मधुरता भर

कैलेण्‍डर बदलने के साथ ही स्वयं को

सृजन हेतु लगा सके,

तभी है सार्थकता

इस नव वर्ष की।

--

सम्‍पर्कः-हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर-2424010प्र0 9410985048

ईमेल:-shashank.misra73@rediffmail.com

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