April 2011

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल कविता - मुन्ना भैया

मुन्ना भैया कितने अच्छे मुन्ना भैया कितने पक्के नहीं कहीं से भी दिखते हैं किसी तरह के चोर उचक्के ।   सबसे ह‍ंस हंसकर मिलते हैं बनते दोस्त स...

यशवन्‍त कोठारी का आलेख - भारतीय रेल की कहानी

भारत में स्‍थल यातायात का प्रमुख साधन रेल गाड़ी ही है। रेलें भारतीय जन मानस में रची बसीं हुईं हैं। कई लोक गीतों में रेलों, रेल यात्राओं आद...

एस के पाण्डेय की लघुकथा - पागलपन

पागलपन “वह सिर्फ मेरी है। उसके और मेरे बीच में में कोई आया तो उसकी खैर नहीं.....।“ मोहन रामू से यह सब बोले जा रहा था। रामू बोला “ आखिर मैं ...

उमेश कुमार चौरसिया की लघुकथाएं

  अपराध कुछ लोग बतिया रहे हैं - ‘तुम्‍हें पता है वहां अपराध कम हो रहे हैं।‘ ‘अच्‍छा ! .......हमारे यहां तो दिन पर दिन बढ़ ही रहे हैं।‘ ‘वह...

नागेश पांडेय 'संजय' की बाल कविता - आओ पेड़ लगाएँ

सारे जग के शुभचिन्तक, ये पेड़ बहुत उपकारी।   सदा-सदा से वसुधा इनकी ऋणी और आभारी।   परहित जीने-मरने का  आदर्श हमें सिखलाएँ। फल देते, ईं...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बालगीत

        प्यारा घोड़ा          घोड़ा है भाई घोड़ा है          कितना प्यार घोड़ा है          मुंबई से दिल्ली तक का          उसने रस्ता जोड़ा है|  ...

मिलन चौरसिया की कविता : ऐसा हुआ न कभी पहले

दिल मेरा सम्हाले नहीँ सम्हले, ऐसा हुआ ना सनम कभी पहले । दिल मेरा ये मेरा नहीँ लगता, इसपे जोर भी मेरा नहीँ चलता, क्या जतन करुँ कैसे ये ...

सुमित शर्मा की ग़ज़ल

ग़ज़ल अब शाहों का सिंहासन, जल्‍दी थर्राने वाला है, मिजाजे आम हैं बिगड़ा, बवंडर आने वाला है।   बड़ी ही देर से सही, मगर आवाज तो आई, यहाँ उज...

शशांक मिश्र ‘‘भारती'' की बाल कथा - दादा जी की चिन्ता

‘‘ दोस्‍तों , हमारा देश महान है, जहां अनेक महापुरुषों ने जन्‍म लिया है। वहीं पक्षियों की बात करने वाल सलीम अली की जन्‍मभूमि भी यह भारत है; ...

एस के पाण्डेय का व्यंग्य : चाय पीने-पिलाने के फायदे और नुकसान

हिं दुस्तान में बहुत पहले हर घर में गाय रखी जाती थी। और आज किसी-किसी घर में गाय मुश्किल से मिल पाती है। गाय भले ही मुश्किल से मिलती हो लेकिन...

रत्‍नकुमार सांभरिया की कहानी - खेत

बूढ़ा के लिए खेत था। सोलह आना सच यह था कि वह दो सौ वर्ग गज का प्‍लाट था , उसके 25-25 वर्ग गज के आठ क्‍यार बनाये हुये थे। क्‍यार-क्‍यार न्...

डी0एल0 खन्‍ना ‘प्‍यासा' की कविताएँ - क्यों आजकल उनकी वाणी में, फूल कम, अंगारे ज्‍यादा हैं

जीवन क्रम   बचपन गुजारा खेले में, मेले में, मां की झोली में बाप की बाहों में यौवन गुजारा प्‍यार की मस्‍ती में वंश की वृद्धि में आर्थिक समृद...

मनोज मिश्र का आलेख - भारत का मेडिकल टूरिज्‍म और ओबामा की चिन्‍ता

यह मात्र संयोग नहीं है कि भारत के विरूद्ध सुपर बग तथा अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की अमेरिकियों के सस्‍ते इलाज के लिए भारत या मैक्‍सिकों...

लक्ष्‍मीकांत त्रिपाठी की कहानी - एक रात

प्र साद और रूबी वापस आ चुके थे. चंडीदास ने चपरासी को भेजकर प्रसाद को अपने चैंबर में बुलवाया. ‘‘ नमस्‍ते सर! '' कहने के बाद प्रसाद ...