मंगलवार, 29 नवंबर 2011

शशांक मिश्र भारती की बाल कविता - कर्म का फल

कर्म का पथ सूरज पूरब में उगकर पश्‍चिम में होता अस्‍त है,   सुख-दुख का अटल नियम, इससे ही होता सत्‍य है,   सूर्योदय ही भाग्‍योदय है भाग्‍योदय...

अमिता कौंडल की कविता - दादा का बागीचा

डॉ. अमिता कौंडल तुम्हारे दादा ने लगाया था कभी हरा भरा बागीचा पिता ने दे पानी और खाद की थी इसकी परवरिश इसकी डालियों पर झूल कर तुम सब बड़े ...

कृष्ण गोपाल सिन्हा का व्यंग्य - रामलीला मैदान के बहाने

जनार्दन जी एक दिन अपने बाललीला के दिनों को याद करते-करते रामलीला को याद करने लगे. कहने लगे, जब रामलीला के दिन आते तो बड़े उत्साह के साथ छोट...

सृजन के तत्वावधान में पुस्तक विमोचन और साहि‍त्‍य चर्चा आयोजित

विशाखापटनम की   हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य, संस्‍कृति‍ एवं रंगमंच को समर्पि‍त संस्‍था “सृजन” ने दि‍नांक 27 नवंबर 2011 को द्वारकानगर स्‍थि‍त ग्रंथाल...

अनन्‍त आलोक की लघुकथा पत्‍नी की जरुरत

बाबू राम लाल जी की रिटायरमेंट में अभी एक वर्ष था कि अचानक उनकी पत्‍नी की ह्रदयघात मृत्‍यु हो गई। बाबू को अभी इकलोते पुत्र का विवाह करना था ...

धर्मेन्द्र कुमार सिंह की कविता - फल और डालियाँ

फल और डालियाँ जब से फलों से लदी हुई डालियों ने झुकने से मना कर दिया फलों ने झुकी हुई डालियों पर लगना शुरू कर दिया अब कहावत बदल चुकी...

शशांक मिश्र भारती की रचना - बाल साहित्‍य एवं सामाजिक सरोकार

बालक के व्‍यक्‍तित्‍व निर्माण में समाज की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। बालक की अभिरुचियों, कौशलों, आवश्‍यकताओं को प्रभावित करने वाले बाल साहित...

कृष्ण गोपाल सिन्हा का व्यंग्य - इंडियन राइटर्स लीग बतर्ज़ आईपीएल

जनार्दन जी की स्वीकृति और आशीर्वचन मिलने के बाद से मैं अपनी गिनती स्वयंभू लेखकों में करने लगा हूँ . लेखकीय वाइरस से संक्रमित होने के कारन व...

मीनाक्षी भालेराव के गीत व कविताएँ

गीत शृंगार बलम तुम कहाँ थे सारी रात मैन सोलह किया श्रृंगार बलम तुम कहाँ थे सारी रात   कजरारे नैनों में काजल लगाया घुंघराले बालों पे गजर...

पुनीत बिसारिया का आलेख - इक्‍कीसवीं सदी में प्रेमचंद की ज़रूरत

प्रेमचंद की पचहत्‍तरवीं पुण्‍यतिथि (8 अक्तूबर 1936) पर विशेष आलेख इक्‍कीसवीं सदी में प्रेमचंद की ज़रूरत प्रेमचंद को पढ़ना उन चुनौतियों ...

अमर शहीद लाला लाजपतराय की याद में त्रिभाषी कवि सम्‍मेलन

चण्‍डीगढ़ ः भारतीय साहित्‍य परिषद (रजि 0), मोहाली द्वारा तथा साहित्‍यिक संस्‍था ‘ मंथन ', चण्‍डीगढ़ के सहयोग से ‘ सर्वेंट पीपल्‍स सोसा...

सोमवार, 28 नवंबर 2011

अनुराग तिवारी की सात बाल कविताएँ

  इन्‍द्र धनुष ( बच्‍चों की 7 कविताएँ) प्रार्थना जो है एक और नाम हज़ार, जिसकी महिमा अपरम्‍पार, जिसको कहते हैं ईश्‍वर, जिसको...

गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' के दो व्यंग्य

किस्सा दुग्ध चोर उर्फ कल्कि अवतार का सुबह-सुबह ‘गिरगिट’ मेरे पास दौड़ा-दौड़ा आया और बोला, अमायार! अब तो हद ही हो गई। लोग दूध चुराने लगे। अग...

रामदीन की हास्य-व्यंग्य कविता - कमीना कुत्ता

‘‘ अर्ध-सत्‍य '' ‘ कहा कमीना कुत्‍ता ' पिछले दिवस निकट दिल्‍ली के मजमा थे अलबेला। अलबेली मोटर कारों का हुआ था रेलमपेला। हाहाक...

रघुनंदन प्रसाद दीक्षित प्रखर की रिपोर्ट, समीक्षा व कविताएँ

साहित्‍यिक रिपोर्ट सरिता लोक सेवा संस्‍थान का दशम्‌ सारस्‍वत सम्‍मान समारोह एवं राष्‍ट्रीय कवि सम्‍मेलन सम्‍पन्‍न । अवध क्षेत्रांर्तगत जन...

कैस जौनपुरी का धारावाहिक - 10 वीं कड़ी - आओ कहें... दिल की बात : मेरी बेटी

  पिछली कड़ियाँ  - एक , दो , तीन ,  चार , पांच , छः , सात , आठ , नौ आओ कहें...दिल की बात कैस जौनपुरी मेरी बेटी मेरी बेटी, मैं तुझसे...

रविवार, 27 नवंबर 2011

पंकज शुक्ल की तीन ग़ज़लें - मैं बच्चा बन के फिर से रोना चाहता हूँ...

1. मैं बच्चा बनके फिर से रोना चाहता हूं... के अपनी बदगुमानियों से उकता गया हूं, मैं बच्चा बनके फिर से रोना चाहता हूं। न हमराह न हमराज़ इन ...

शनिवार, 26 नवंबर 2011

रविकान्त का आलेख - हिन्दी फ़िल्म अध्ययन: माधुरी का राष्ट्रीय राजमार्ग

  रविकान्त, एसोसिएट फ़ेलो, सीएसडीएस बहुतेरे लोगों को याद होगा कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया समूह की फ़िल्म पत्रिका माधुरी हिन्दी में निकलने वाली अ...

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