रविवार, 22 जनवरी 2012

मेघालय में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन 2012 की तैयारियाँ शुरू

पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग

"पूर्व के स्काटलैंड के रूप में प्रसिद्ध मेघालय की राजधानी शिलांग में भी हिन्दी का अच्छा खासा प्रभाव है. पहाड़ियों पर बसे इस खूबसूरत शहर में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी,हिन्दी के विकास और विस्तार में लगी है. "

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पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी की स्थापना 1990 में हुई थी. अकादमी वहाँ के अहिन्दी भाषी लोगो के मन में हिन्दी के प्रति लगाव की भावना जगा कर उन्हें हिन्दी से जोडने के लिए प्रयासरत है. ये संस्था पूर्वोत्तर की स्थानीय भाषाओं जैसे खासी,बोरो,असमी, मणिपुरी और बांग्ला के विकास और समन्वय के लिए भी काफी काम कर रही है.

भारतीयता के वृहद उद्देश्य से काम कर रही इस संस्था के उद्देश्यों में कला और संस्कृति का प्रचार भी शामिल है.अपने कार्यक्रमों के माध्यम से अकादमी उत्तर-पूर्व के राज्यों के साथ देश के अन्य राज्यों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के द्वारा राष्ट्रीय एकता को भी विकसित कर रही है.

शिलांग (मेघालय) में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन 2012 की तैयारियाँ शुरू

"अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर मेघालय की राजधानी शिलांग में अगले साल फिर से हिन्दी का एक कुम्भ लगेगा. हिन्दी के इस कुम्भ का आयोजन पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के लिए समर्पित संस्था पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी द्वारा किया जाएगा. इस सम्मेलन के लिए अकादमी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. इसमें हिन्दी के लेखकों और हिन्दी सेवियों का सम्मान भी किया जाएगा. "

पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी द्वारा 25 मई 2012 से 27 मई 2012 तक मेघालय की राजधानी शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा.इस चार दिवसीय सम्मेलन में देश- विदेश के हिन्दी लेखक,साहित्यकार,रचनाकार, हिन्दी सेवी और हिन्दी प्रेमी भाग लेंगे. उल्लेखनीय है अकादमी द्वारा 2011 में आयोजित हिन्दी विकास सम्मेलन काफी सफल रहा था. इसमे केन्द्रीय राज्य मंत्री सुश्री अगाथा संगमा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी.

इस बार सम्मेलन में डॉ. महाराज कृष्ण जैन की ग्यारहवीं पुण्य तिथि के अवसर पर हिंदी लेखकों और हिंदी सेवियों का सम्मान भी किया जाएगा.

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सम्मेलन में भाग लेने वाले लोग पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक परपराओं से रूबरू हो सके इस हेतु अकादमी ने एक दिन स्थानीय पर्यटन के लिए सुरक्षित रखा है. इस तरह ये सम्मेलन हिन्दी के विकास के साथ-साथ हिन्दी भाषी समाज को पूर्वोत्तर भारत से जोडने के लिए सेतु की भूमिका भी निभाएगा.

इस सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए पूर्व पंजीयन आवश्यक है.

. पंजीयन के लिए अकादमी के सचिव से इस पते पर संपर्क किया जा सकता है. संपर्क  - सचिव,  पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, पो. रिन्जा, शिलांग 793006, मेघालय, या http://purvottarhindiacademy.blogspot.com देखे। मोबाइल- 09436117260, 9774286215, 9862201449, email: hindiacademy1@gmail.com

 

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डॉ. अकेलाभाइ को

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार 2009

प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गत दिनांक 28 दिसम्बर को पत्र सूचना कार्यालय, शास्त्री भवन, नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में पूर्वोत्तर सेवा, आकाशवाणी, शिलांग के वरिष्ठ हिंदी उदघोषक एवं पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के मानद सचिव हिंदी सेवी डॉ. अकेलाभाइ को समय प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक “रेडियो साहित्य एवं पत्रकारिता” के मौलिक लेखन के लिए वर्ष 2009 का भारतेन्दु हरिशचन्द्र पुरस्कार से मुख्य अतिथि डॉ. एस. जगतरक्षकन, माननीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। पुरस्कार के रूप में 20,000-00 रुपये नकद, अंग वस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र श्री उदय कुमार वर्मा, सचिव, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, श्री के. गणेशन, निदेशक, प्रकाशन विभाग तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में दिया गया।

उल्लेखनीय है कि 50 वर्षीय डॉ. अकेलाभाइ को पूर्वोत्तर भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अबतक 22 पुरस्कार एवं सम्मान विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदान किया जा चुका है। डॉ. अकेलाभाइ हिंदी के प्रचार के लिए आकाशवाणी एवं विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से प्रति वर्ष क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं।

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