मंगलवार, 17 जनवरी 2012

देवेन्द्र कुमार पाठक के गीत व नवगीत

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नवगीत/
अटके -भटके ठाँव -कुठाँव/

                       
तिनके- सी औकात  ,
इरादोँ के लंबे पर -पाँव ;
अटके- भटके ,ठाँव-कुठाँव ।  
पाला पिटी ख़्वाहिशेँ खेतोँ मेँ दम तोड़ रहीँ  ;      
घोर हताशाएँ कुतियोँ- सी   हाड़ चिँचोड़ रहीँ ;          
चले हिमानी अंधड़  नस  -नस जड़ता पैठ रही ,        
साँस अंतिम गिन रहा अलाव ।                         
चिरई के दुधमुँह छौने -सा ठिठुर मरा उल्लास ;         
मुखर हुई गाली -गलौज बन भीतर भरी भड़ास ;    
आशंकाएँ अँड़स रहीँ अंतस मेँ काँटो -सी ;          
शिकंजे कसने लगा गलाव।       

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गीत-:
क्योँ कोई भी अब /
       
              
~  ~  ~  ~
सोच भी अब है कहाँ वैसी , 
बाप-दादोँ के गए-गुज़रे समय जैसी ;
बस यही अहसास रह-रह कोँचता है; 
क्योँ कोई भी अब न वैसा सोचता है ।                     
सोच की जिस धूप मेँ पकती थी करुणा की फ़सल, 
जिसकी बारिश मेँ था उफनाता हृदय का नेह जल ; 
सोच वह अब  है नज़रबंद साँसतोँ मेँ,
दहशतोँ मेँ ;तू उसे इस चौँधियाती रोशनी मेँ खोजता है ।                     
सोच वह जकड़ी हुई जाति-ज़मातोँ मेँ ,
बन गई कठपुतली वह लिप्सा के हाथोँ मेँ ; 
सोच मेँ धुँधला कोई आभास -सा कुछ कँपकँपाता ; 
तंग़ज़ेहनी की  गली मेँ क़ैद आँसू पोँछता है ।

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AATMPARICHAY          DEVENDRA KUMAR PATHAK [ TAKHLLUS 'MAHROOM' ] DATE OF BIRTH -02.03.1955 /    VILLEGE- 'BHUDSA' , (BADWARA)  DIST-KATNI (M.P.) EDUC.-M.A.B.T.C.(HINDI /TEACHING )HINDI TEACHER IN A MIDDLE SCHOOL / EDU.M.P. GOVT. /PBLSHD BOOKS - 'VIDHRMI', 'ADANA SA ADAMI' ;[NOVEL ] 'MUHIM', 'MARI KHAL: AKHIRI TAL', 'DHARAM DHARE KO DAND' , ' CHANSURIYA KA SUKH' [STORIES BOOKS] 'DIL KA MAMLA HAI'[SATIRES] 'DUNIYA NAHIN ANDERI HOGI' [ POEMS] 1981  SE PATR-PATRIKAON MEN  PRKASHAN /REDIO -T.V. SE PRSARAN/ PREMNAGAR,KHIRAHANI;POST SCINECE COLLEGE POST OFFICE-KATNI. 483501 M.P./

3 blogger-facebook:

  1. ,,pala piti khwahishen,,aur ,,thithur mara ullas,,
    wah!kya kahne.

    उत्तर देंहटाएं
  2. I ALWAYS LIKE YOUR SONGS & GAZALS........KEEP IT ON.......

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  3. I ALWAYS LIKE YOUR SONGS & GAZALS........KEEP IT ON.......

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