गुरुवार, 26 जनवरी 2012

चन्द्रकान्त देवताले की कविता - आकाश की जात बता भइया?

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धूं- धूं कर धधकती फैलती आग
भाइयों यहाँ तो पीने के पानी का अकाल है ।

मारकाट-चीख-पुकार- भगदड़
बहनों यह तो दूल्हाचार और बने गाने का मौसम है ।

दूध और गेहूँ के ईश्वर कौन है भइया?
आम और तरबूज का कौन-सा मजहब है?
पानी
आग
हवा की जात कौन-सी है भाई?

कोई जवाब नहीं देता
सिर्फ ठहरे आँसू
और होंठों पर कांटेदार कँपकँपी है ।

अंधेरे से निकल कर आते हैं वे
और घरों को सडकों पर
चकनाचूर कर देते हैं
मजहब की किताबों के पन्ने
फाडकर चबाकर आते हैं वे
और धड़कनों की फसलों को
आग चाकू फरसों की पाशविक हिंसा के
हवाले कर देते हैं ।

धुएँ के पहाड़ में
घबराए बच्चे माओं को
और बदहवास माएँ बच्चों को पुकारती हैं ।

इस पुकार को जो रौंदते हैं जूतों से
वे सिर्फ बिके हुए मजहब के दलाल हैं
कुर्सी-तिजोरी के सामने मस्तक नवाते शैतान
मुट्ठी दो मुट्ठी नोटों को जेबों में ठूंस
बोतल दो बोतल शराब के सहारे
कुर्सी-तिजोरी और शोषण-पाखंड के
गढ़ों की नीवों को पुख्ता करने के खातिर
फायदे का वक्त और मौका ढूंढकर
जीवन संघर्ष के सरोवर में ऐसा खतरनाक जहर
मिलाते हैं
कि अन्न और पानी और अक्षर के लिए
जूझते लोगों की दुनिया में
बेहोशी छा जाती है ।

मौत की बस्ती के अंधेरे में इतिहास फिर से लँगड़ाने
लगता है
टूटी हुई सीढ़ियों के नीचे
बिन होंठों के बच्चे
बिन स्तनों की माताएँ
अपाहिजों तक की मृत देहों के क्षत-विक्षत
टुकड़ों से टकराता इतिहास
जहाँ भी लकडी खटखटाता है
वहाँ खून का थक्का
या भाषा की राख का ढेर ही होता है ।

अफीम की सुरंग से निकलकर
फिर शुरू होता है सत्य के लिए
गहरी नई कब्र खोदने का खतरनाक तमाशा
धर्मों के ठेकेदार मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे के
आँगन में गहरे गड्ढे खुदवाने लगते हैं
फिर भाइचारे का नाटक और नेपथ्य में नशे के नए
ठेकों की नीलामी शुरू होती है ।

कोई नहीं सुनता माई की पुकार
जो छाती कूटती पूछती है बार-बार
कहाँ गई बेटी मेरी
कहाँ मेरा घर-दुआर

समुद्र को टुकड़ों में बाँटने वालों
मनुष्य की विपदा के मलबे को
अखबारों से ढाँपने वालों
जवाब दो माई के सवालों का
लहूलुहान माथे को नोंचती
पूछ रही माई –

आकाश की जात बता भइया?
धरती का धरम बता?
धुएँ के पहाड़ में पथराई आँखों की
चुप्पी के ईश्वर का नाम बता?

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com  फतुहा पटना की कलाकृति)

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  1. नरेंद्र तोमर10:12 pm

    मन को छूने और विचारो को उत्‍तेजित करने वाली कविता।

    उत्तर देंहटाएं

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