मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ - धडकनों के सांझ पर सजते हैं स्वर जिसके...

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गजल

कुछ कर गुजरने की चाहत यहाँ तक ले आई

अब देखते हैं हौसले क्या रंग लाते  हैं

 

बेमकसद सी जिन्दगी जिए जा रही थी

अब देखते हैं ख्वाहिशें क्या रंग लाती हैं

 

थोड़ी मिली थी मोहलत मन को बहलाने की

अब देखते हैं मसरुफगी क्या रंग लाती है

 

तजुर्बगारों से सलाह हर बार ली मैंने

अब देखते हैं मनमुताबिक क्या रंग लाती है

 

नाबन्दगी में ता उम्र गुजर दी हमने

अब देखते हैं बन्दगी क्या रंग लाती है

 

मुहब्बत है दुनिया का रंगीन फसाना

 

मुहब्बत है दुनिया का रंगीन फसाना

हर एक चाहता है इस रंग में डूब जाना

धडकनों के सांझ पर

सजते हैं स्वर जिसके

पलकों के किनारे

बसते हैं घर जिसके

अश्क है गहना जिसका

जुदाई रिवाज है

समाज है बेड़ियाँ जिसकी

दुनिया कैद खाना

मुहब्बत..

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2 टिप्पणियाँ "मीनाक्षी भालेराव की कविताएँ - धडकनों के सांझ पर सजते हैं स्वर जिसके..."

  1. नाबन्दगी में ता उम्र गुजर दी हमने
    अब देखते हैं बन्दगी क्या रंग लाती है

    wah wah
    my blog
    http://rhythmvyom.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. मीनाक्षी जी आपकी रचनाएँ पढ़ी अच्छी लगी | प्लीस आप बुरा मत मानना पहली रचना के आपने गजल का नाम दिया है लेकिन ये कविता है कृपया गजल के में पढ़ लें | कवितायेँ अच्छी है , बधाई |

    उत्तर देंहटाएं

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