रविवार, 29 जनवरी 2012

कवि मनोहरलाल हर्ष की पुस्‍तक ‘मूषक पुराण‘ का विमोचन

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मनोहर लाल हर्ष

पौराणिक संस्‍कृति से जुड़े प्रसंगों का श्रद्धा से चित्रणः संवित सोमगिरी जी

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बीकानेर/जयपुर। हास्‍य व्‍यंग्‍य रचनाकार एवं चित्रकार श्री मनोहरलाल हर्ष ‘कविहृदय की पुस्‍तक ‘मूषक पुराण‘ का विमोचन यहां मरूधर हैरिटेज होटल में आयोजित कार्यक्रम में हुआ। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए लालेश्‍वर महादेव मंदिर शिवबाड़ी के अधिष्‍ठाता संवित सोमगिरी जी महाराज ने कहा कि पुराणों में हमारा धर्म और संस्‍कृति समाहित है, कृति ‘मूषक पुराण‘ में हर्ष ने पुराण शब्‍द और पुराणों के प्रति श्रद्धा भाव का प्रदर्शन करते हुए पौराणिक प्रसंगों का बारीकी से चित्रण किया है, जो एक बेजोड़ मिसाल है।

उन्‍होंने कहा कि हर्ष की कविताओं में गहराई और सौम्‍यता है, इनके माध्‍यम से उनके चित को टटोले तो ऐसा लगता है कि कि मानो वे सागर में कुछ ढूंढ रहे है, कविताएं मोती के समान पिरोई हुई लगती है। महराज श्री ने कहा कि कवि ने पौराणिक और समसामयिक घटनाओं को मूषक पुराण में वर्णित करते हुए समाज का ध्‍यान आकर्षित किया है।

उन्‍होंने कहा कि मूषक भगवान श्री गणेश का वाहन है और यह अध्‍यात्‍म और बुद्धि का प्रतीक है, कवि ने नूतन तरीके से हास्‍य और व्‍यंग्‍य का समावेश किया है। पुस्‍तक लोकार्पण समारोह के मुख्‍य अतिथि बीकानेर के महापौर श्री भवानीशंकर शर्मा ने कहा कि पुस्‍तक में रिश्‍वतखोरों के प्रति रोष है तो आतंकवादियों को नेस्‍तनाबूद करने का हौसला भी है, इसमें संगीत की साधना और हास्‍य रस की फुहार का अनोखा संगम है। हर्ष की कविताओं में हास्‍य-व्‍यंग्‍य के साथ-साथ राष्‍ट्र प्रेम, परमार्थ और स्‍पष्‍टवादिता का अनूठा संगम है।

कार्यक्रम के विशिष्‍ट अतिथि राजस्‍थानी भाषा, साहित्‍य और संस्‍कृति अकादमी के अध्‍यक्ष श्री श्‍याम महर्षि ने कहा कि मूषक की हमारी पौराणिक संस्‍कृति में गणेश के वाहन के रूप में विशिष्‍ट पहचान है। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान समाज में गंभीरता और भागमभाग के दौर में हास्‍य-व्‍यंग्‍य की यह पुस्‍तक सुखद अहसास कराएगी।

वरिष्‍ठ कवि और साहित्‍यकार श्री भवानीशंकर व्‍यास ‘विनोद‘ ने कहा कि हर्ष की कविताएं गुदगुदाने वाली है, इससे पाठक हंसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर होंगे। उन्‍होंने छः तरीकों के व्‍यंग्‍यों का जिक्र करते हुए कहा कि कविहृदय ने मूषक पुराण में चूहों को माध्‍यम बनाकर समाज की असहनीय स्‍थितियों पर आक्रोश व्‍यक्‍त किया है। ‘विनोद‘ ने मूषक पुराण की भाषा को बोधगम्‍य और तारतम्‍यता लिए हुए बताते हुए कहा कि कथ्‍य अपने आप में पूर्ण है।

मूषक पुराण पर अपनी पाठकीय टीप में वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री सरल विशारद ने कहा कि पुस्‍तक में चूहों के माध्‍यम से सामाजिक बुराईयों पर कटाक्ष किए गए है। उन्‍होंने चूहे का मानवता के लिए उपयोगी जीव बताते हुए कहा कि जीवन रक्षक औषधियों का शोध चूहों पर ही किया जाता है। लोकार्पण समारोह में रचनाकार श्री मनोहर लाल हर्ष ने मूषक पुराण की चुनिंदा कविताओं का पाठ करते हुए मूषक पुराण बनाने का कारण, मूषक की किस्‍मों और पौराणिक कथाओं के बारे में बताया। समारोह के संरक्षक गीतकार एवं वरिष्‍ठ उद्‌घोषक श्री चंचल हर्ष ने अपने उद्‌बोधन में कहा कि मूषक की कथा अपने आप में अद्‌भुत है, उन्‍होंने कविता पाठ किया और सभी का आभार व्‍यक्‍त किया। समारोह का संचाचन प्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार श्री बुलाकी शर्मा ने किया। युवा साहित्‍यकार श्री संजय आचार्य ‘वरूण‘ ने पुस्‍तक पर पत्रवाचन किया। लोकार्पण समारोह में लेखक, कवि, साहित्‍यकार तथा गणमान्‍य नागरिक मौजूद थे।

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