गुरुवार, 5 जनवरी 2012

अनुराग तिवारी की कविताएँ - माँ

 

माँ

माँ!

मैं तुम्‍हें देख नहीं सकता,

सुन नहीं सकता,

छू भी नहीं सकता,

पर अनुभव कर सकता हूँ।

 

माँ, तुम हो मेरे तन-मन के अणु-अणु में,

मेरी धमनी में बहने वाले

लोहू के कण-कण में,

मेरी मति, गति और वृत्‍ति में।

 

माँ, क्षमा करो अपने प्रति मेरे अपराधों को

जो हुए हों मुझसे,

जाने-अनजाने में,

मन, वचन या कर्म से।

 

दो चिर्‌ आशीष।

श्री हरि से है निवेदन,

दें तुम्‍हें शरण

अपने चरण में।

 

दें दिव्‍य मोक्ष।

श्री विष्‍णवे नमः।

श्री विष्‍णवे नमः।

श्री विष्‍णवे नमः।

 

..........

माँ की याद

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

कभी रुलाती, कभी समझाती,

जीने की है राह बताती,

कभी तुलसी का चौरा लगती,

कभी मानस की चौपाई।

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

 

जब-जब मेरे कदम डिगे,

आगे बढ़ तुमने थाम लिया,

धीरज धर आगे बढ़ने की

बात हमेशा सिखलाई।

 

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

अपने ग़म-आँसू दबा छिपा,

दी दूर-दृष्‍टि की सीख हमें।

दया, धर्म, करुणा, क्षमा

की मूरत थी तू माई।

 

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

मुझे गर्व है तुम जैसी

माता का बेटा होने पर,

देती है तेरी याद बढ़ा,

इस छाती की चौड़ाई।

 

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

कभी-कभी सपने में आ,

मुझको दर्शन दे जाना माँ।

है पता मुझे, अब सच में तू

नहीं पड़ेगी दिखलाई।

माँ, याद तुम्‍हारी आई।

 

..........

माँ की गोद

माँ, तेरी गोदी में सिर रख

फिर रोने को दिल करता है।

जब से है छूटा साथ तेरा,

जग सूना सूना लगता है।

 

हर चीज बेगानी लगती है,

हर ख्‍़वाब अधूरा लगता है।

माँ, तेरी गोदी में सिर रख

फिर रोने को दिल करता है।

 

तेरी यादों में दिन बीते,

तेरे सपनों में रात कटी,

तेरी सीखों का दिया मेरा

जीवन पथ रौशन करता है।

 

माँ, तेरी गोदी में सिर रख

फिर रोने को दिल करता है।

तुम कहती थी जग धोखा है,

दिखने में लगता चोखा है।

 

माँ, तेरे साथ जिया हर पल

नयनों में तैरा करता है।

माँ, तेरी गोदी में सिर रख

फिर रोने को दिल करता है।

..........

-सी ए. अनुराग तिवारी

5-बी, कस्‍तूरबा नगर,

सिगरा, वाराणसी- 221010

4 blogger-facebook:

  1. jyoti singh5:52 pm

    anuraag ji aapne bahut acchi kavita likhi hai,

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. kavita aapko achhi lagi. meraa prayaas saarthak hua. thanks.

      हटाएं
  2. Vivek Garg9:23 pm

    ultimate , dnt have any word for these lines

    उत्तर देंहटाएं
  3. माँ की याद कभी दिल से भुलाई नही जाती बचपन की याद तो कुछ खास रही मेरे लिये मै अक्कसर अपने बचपन के दिनो को याद करता था जब माँ मुझे नहलाती थी जब खाना खिलाती थी और जब मारती थी मारने के बाद जो प्यार करती थी आज भी याद अते ही आख से आशु गुरने लगते हैँ सच मेँ कितना प्यार किया करती थी माँ मुझे मैँ आज समझा बचपन की याद-याद आते ही रहती हैँ अक्कसर मै जब भी बच्चो को देखता हूँ तो मुझे अपने धुधला-धुधला बचपन याद आ जाता हैँ और मै रोने लगता हूँ याद करके क्योकी अब वो दिन दोबारा आ नही सकते शायद मैने अपने माँ को बहुत सताया होगा जिसका आज मुझे दुख हैँ और मै बहुत बहुत रोता हूँ यादो मेँ सोचता हूँ की माँ की ममता माँ के प्यार का मै कैसे कज्र चुकाउगा और कैसे अपने आप को मै माफ कर पाउगा ये सोचता हूँ धुधली याद गोस्वामी जी के साथ बचपन का सफर आगे पूरी कहानी पडी हैँ तब तक के लिये धन्यबाद

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------