रविवार, 15 जनवरी 2012

सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री की व्यंग्य कविता : राजनीति का विकट पहाड़ा चहुं ओर बज रहा नगाड़ा

राजनीति का विकट पहाड़ा

चहुं ओर बज रहा नगाड़ा

 

जमूरे

सबको पहचान लो ?

पहचान लिया

चारों तरफ घूम जा

घूम लिया

जो पूछूं वह बतलाऐगा

हाँ बतलाऊँगा

राजनीति की बात निराली

सब खाने को तैयार हरियाली

सपा ने दिया मुफ्‍ती का नारा

देखो जनता को लगता कितना प्‍यारा

 

ललितपुर से मुकाबले में चाचा-भतीजे

आश्‍चर्य जनक हो सकते नतीजे

माया की बुत पर परदा गया डाला

चुनाव आयोग का निर्देश था आला

मायाराज पर सभी का निशाना

मुश्‍किल है हाथी को आगे बड़ पाना

राहुल ने गोरखपुर में की हुंकार

साइकिल पन्‍चर उस पर बैठना बेकार

भाजपा चुनावी दंगल को हुई तैयार

दो का के चक्‍कर में हो रही तकरार

 

भाजपा में बन गई गई लाबी

कैसे मिलेगी सत्‍ता की चाभी

शरद यादव का खेल निराला

भाजपा को मुश्‍किल में डाला

जदयू ने पकड़ी अपनी अलग राह

यूपी में ताकत बनने की थी चाह

एनडीए की कैसे चलेगी नाव

जब बड़ जायेगा इतना टकराव

छोटे दलों की था - था थैया

बड़ों-बड़ों की डुबो सकते नैया

दल बदलुओं का खेल निराला

नरेश, शाहिद, अनुराधा ने बदला पाला

 

बड़ा गजब करेंगे सब मिल

कुर्सी बिन लगता नहीं दिल

कहते जहाँ नहीं चैना

फिर वहाँ नहीं रहना

राजनीति का सफर यह सुहाना

तिकड़म से सिर्फ कुर्सी पाना

हमसे नहीं सिर्फ कुर्सी से जमाना

कुर्सी खिसक जाने पर था जाना।

 

राजनीति का विकट पहाड़ा

चहुं ओर बज रहा नगाड़ा

वोटर ने हैरत में है डाला

अब क्‍या है होने वाला ।

 

-सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री

राजसद ः 120/132

बेलदारी लेन, लालबाग, लखनऊ

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------