शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

सत्यवान वर्मा सौरभ के दोहे

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दोहे

१ कांटों को अपनाइए होते कांटे नेक।

रहके कांटों बीच ही खिलते फूल अनेक।।

 

२ आओ मिलकर सब बढ़े नए सत्र की ओर।

बार बार पुकार रही नयी सुहानी भोर।

 

३ बीते कल को भूल के चुग डाले सब फूल।

बोये हम नव भोर पे सुंदर सुरभित फूल।

 

४ तू भी पाएगा कभी फूलों की सौगात।

धुन अपनी मत छोड़ना सुधरेंगे हालात।।

 

५ आओ कांटों में भरे फूलों का अहसास।

ताकि चंदन से महके धरती औ’ आकाश।।

 

६ उठो चलो आगे बढ़ो भूलों दुख की बात।

आशाओं के रंग में रंग लो फि र जज्बात।।

 

७ नये दौर में हम करे ऐसा नव प्रयास।

शब्द जो ये कलम लिखे बन जाए इतिहास।।

 

८ बने विजेता वो सदा ऐसा मुझे यकीन।

आँखों आकाश हो पांवो तले जमीन।।

 

९ साथी कभी न छोड़ना नयी भोर की आस।

अंधकार को चीर के, आएगा प्रकाश।।

 

१० मैं तो प्यासा राही हूँ, तुम हो बहती धार।

प्यादो साथी तुम मुझे, भर भर अंजुलि प्यार।।

 

११ जब तुमने यूँ प्यार से, देखा मेरे मीत।

थिरकन पांवों में सजी, होंठों पे संगीत।।

 

उपर्युक्त दोहे मेरे नितांत मौलिक स्वरचित तथा अप्रकाशित है।

 

परिचय
नाम-डा° सत्यवान वर्मा
उपनाम-सौरभ
शिक्षा-पशुचिकित्सा में डिप्लोमा।
जन्म-3 मार्च 1989
जन्म स्थान-बड़वा ,भिवानी, हरियाणा
प्रकाशन-यादें, कविता संग्रह 2005 प्रबोध प्रकाशन नई दिल्ली।
सम्मान-प्रेरणा पुरस्कार- 2008
राष्ट्रभाषा रत्न महाराष्ट्र 2009
पत्रिकाएं-देश-विदेश की लगभग 200
प्रसारण-आकाशवाणी हिसार व दूरदर्शन हिसार से।
कम्प्यूटर ज्ञान-हिन्दी में टाईप कर सकते हैं।
सम्पादक-प्रयास पाक्षिक
वर्तमान पता-333,कविता निकेतन, बड़वा ,भिवानी, हरियाणा-127045
मोबाईल-0946652148

2 blogger-facebook:

  1. प्रिय वर्मा जी आपके दोहे पढ़े बहुत अच्छे लगे एकदम स्केल में भी है बस यति लगाना भूल गए जिसकी दोहे में अहम मेहता है |
    बहरहाल दोहे अच्छे लगे , बधाई स्वीकारें |

    उत्तर देंहटाएं

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