प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बच्चों का गीत - पप्पू के बारह बज गए

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बारह बज गये
बारह बज गये बारह बज गये
बारह के उपर बज गये एक
पंडितजी ने छुट्टी न दी
भूखे मर गये पेट।

मम्मी ने कुछ नहीं बनाया
पापा ने कुछ नहीं खिलाया
दौड़ दौड़ कर शाला आया
नहीं नाश्ते में कुछ खाया
फिर भी टीचर ने डांटा है
कहते हैं कि क्यों आये हो
बच्चू इतने लेट।

घर में आटा नहीं था भाई
मम्मी कुछ भी बना न पाई
इस कारण मैं टिफिन न लाई
दौड़ी दौड़ी शाला आई
इस पर मेंडम ने डांटा है
कहतीं हैं तुम बहुत अनाड़ी
और गंवारू ठेठ।

शाला में ही करें व्यवस्था
मिले नाश्ता बढ़िया अच्छा
खुश होगा हर बच्चा बच्चा
मजा आयेगा सबको सच्चा
जल्दी करो प्रिंसीपल चाचा
अच्छी हमें नहीं लगती है
इतनी लाग लपेट।

नहीं नहीं हम टिफिन लायेंगे
हम सब मिलकर साथ खायेंगे
जो घर से कुछ भी न लाया
उसको सब मिलकर खिलायेंगे
देना अच्छे संस्कार हैं
खुला हुआ है सबकी खातिर
अपने दिल का गेट।

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