गुरुवार, 12 जनवरी 2012

प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बच्चों का गीत - पप्पू के बारह बज गए

बारह बज गये
बारह बज गये बारह बज गये
बारह के उपर बज गये एक
पंडितजी ने छुट्टी न दी
भूखे मर गये पेट।

मम्मी ने कुछ नहीं बनाया
पापा ने कुछ नहीं खिलाया
दौड़ दौड़ कर शाला आया
नहीं नाश्ते में कुछ खाया
फिर भी टीचर ने डांटा है
कहते हैं कि क्यों आये हो
बच्चू इतने लेट।

घर में आटा नहीं था भाई
मम्मी कुछ भी बना न पाई
इस कारण मैं टिफिन न लाई
दौड़ी दौड़ी शाला आई
इस पर मेंडम ने डांटा है
कहतीं हैं तुम बहुत अनाड़ी
और गंवारू ठेठ।

शाला में ही करें व्यवस्था
मिले नाश्ता बढ़िया अच्छा
खुश होगा हर बच्चा बच्चा
मजा आयेगा सबको सच्चा
जल्दी करो प्रिंसीपल चाचा
अच्छी हमें नहीं लगती है
इतनी लाग लपेट।

नहीं नहीं हम टिफिन लायेंगे
हम सब मिलकर साथ खायेंगे
जो घर से कुछ भी न लाया
उसको सब मिलकर खिलायेंगे
देना अच्छे संस्कार हैं
खुला हुआ है सबकी खातिर
अपने दिल का गेट।

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------