गुरुवार, 26 जनवरी 2012

देवेन्द्र कुमार पाठक 'महरूम' का गणतंत्र दिवस विशेष गीत

       गणतंत्र दिवस

                          ~~~~~~ 

गणतंत्र दिवस,                        

गणतंत्र दिवस;                  

यूँ दर्द छुपाकर,                  

तू न विहँस ।   

सच क्या है ?                  

तुझे पता है सब,              

पाबन्दी है सच कहने पर; 

हालात बिगड़ते ही जाते,                

यूँ जनगण के                   

चुप रहने पर;  

चुप रहते बीते                               

बरस- बरस ।  

मौसेरे भाई चोर-चोर,           

इक थैली के चट्टे-बट्टे ; 

मेहनतकश हैँ दूबर लेकिन       

ओहदेवाले हट्टे-कट्टे ;    

हम लोकतंत्र को                               

रहे तरस ।   

अब तेरी छाया के नीचे,          

छल -छद्म घोटाले  हैँ होते ;       

सच्चे-सीधे भूखोँ मरते,    

ईमानखोर पूजित होते ; 

अब है शायद  तू भी बेबस ।             

**=**              

AATMPARICHAY          DEVENDRA KUMAR PATHAK [ TAKHLLUS 'MAHROOM' ] DATE OF BIRTH -02.03.1955 /    VILLEGE- 'BHUDSA' , (BADWARA)  DIST-KATNI (M.P.) EDUC.-M.A.B.T.C.(HINDI /TEACHING )HINDI TEACHER IN A MIDDLE SCHOOL / EDU.M.P. GOVT. /PBLSHD BOOKS - 'VIDHRMI', 'ADANA SA ADAMI' ;[NOVEL ] 'MUHIM', 'MARI KHAL: AKHIRI TAL', 'DHARAM DHARE KO DAND' , ' CHANSURIYA KA SUKH' [STORIES BOOKS] 'DIL KA MAMLA HAI'[SATIRES] 'DUNIYA NAHIN ANDERI HOGI' [ POEMS] 1981  SE PATR-PATRIKAON MEN  PRKASHAN /REDIO -T.V. SE PRSARAN/ PREMNAGAR,KHIRAHANI;POST SCINECE COLLEGE POST OFFICE-KATNI. 483501 M.P.

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