मंगलवार, 17 जनवरी 2012

अनुज नरवाल रोहतकी की ग़ज़ल - आप के शहर में आने से पहले न पूछ सका किसी दीवाने से पहले


अमरेन्द्र

आप के शहर में आने से पहले
न पूछ सका किसी दीवाने से पहले

दिल किसी पे आता है तो आता है
ज़माने से कब पूछता दिल आने से पहले

दियार-ए-इश्क देखा नहीं हमने कभी
आप के शहर में आने से पहले

लोग साथ छोड़ जाया करते है अक्सर
किसी मुसीबत के आने से पहले

इश्क दम तोड़ जाया करता है क्यों
बीमार दिल को आराम आने से पहले

ये अदा तो कोई उनसे सीखे
देख लेता है मुझे नज़र उठाने से पहले

हवाओं का रुख देखा कीजिये
कही भी आग लगाने से पहले

कब सोचता है किसको क्या मिलेगा
बागबान सजर लगाने से पहले

सन्नाटा सा पसर जाता है खलाओ में
"अनुज" जी तूफां आने से पहले

--
 
ANUJ NARWAL ROHTAKI

--

(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com फतुहा पटना की कलाकृति)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------