अनुज नरवाल रोहतकी की ग़ज़ल - आप के शहर में आने से पहले न पूछ सका किसी दीवाने से पहले

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अमरेन्द्र

आप के शहर में आने से पहले
न पूछ सका किसी दीवाने से पहले

दिल किसी पे आता है तो आता है
ज़माने से कब पूछता दिल आने से पहले

दियार-ए-इश्क देखा नहीं हमने कभी
आप के शहर में आने से पहले

लोग साथ छोड़ जाया करते है अक्सर
किसी मुसीबत के आने से पहले

इश्क दम तोड़ जाया करता है क्यों
बीमार दिल को आराम आने से पहले

ये अदा तो कोई उनसे सीखे
देख लेता है मुझे नज़र उठाने से पहले

हवाओं का रुख देखा कीजिये
कही भी आग लगाने से पहले

कब सोचता है किसको क्या मिलेगा
बागबान सजर लगाने से पहले

सन्नाटा सा पसर जाता है खलाओ में
"अनुज" जी तूफां आने से पहले

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ANUJ NARWAL ROHTAKI

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com फतुहा पटना की कलाकृति)

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