मीनाक्षी भालेराव की दो कविताएँ

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्र वन्दना

बाकी है

संभल जाओ ऐ दुश्मने जहाँ

अभी वीरों को जगाना बाकी है

किसी को सुभाष किसी को

भगत सिंह बनाना बाकी है

मेरी सर जमीन का एक-एक वीर

तेरे हजारों सैनिकों पर भारी है

क्या है हस्ती तेरी के तू

मेरा चमन उजाडेगा

हिंद की मिटटी से सामना

होना तेरा अभी बाकी है

धरती के कण-कण से

तूफ़ान देश भक्ति का भरा है

उस तूफान को बवंडर बनाना बाकी है

संभल--------------------------------

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बसंत पंचमी के अवसर पर

सरस्वती वन्दना

तुम हो शारदे,------

पावन पवित्र हंस वाहिनी

श्वेत वस्त्र धारणी

वीणा वादनी

शाश्वत हो साकार हो

तुम जीवन आधार हो

तुम हो शारदे----------

बुद्धि दो बल दो

दे दो हमको ज्ञान तुम

हम नादान संतान तुम्हारी

तुम माँ संसार की

खड़े हैं चरणों मैं

शीश झुकाए

दो विद्या दान हमें

तुम हो शारदे-----

२६ जनवरी के लिए

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