मंगलवार, 17 जनवरी 2012

अनुराग तिवारी की कविता - जाड़े के छंद

जाड़े के छंद

कई दिनों के बाद आज फिर धूप खिली है।

कुहरे की चादर से जग को मुक्‍ति मिली है।

 

बैठे आँगन में सब खायें छान पकौड़ी।

बीच बीच लें चाय की चुस्‍की थोड़ी थोड़ी।

 

बर्फीली पछुआ है सबके हाड़ कँपाती।

दीन, हीन, बूढ़े, बच्‍चों को खूब सताती।

 

कभी कभी सारा दिन बीते, कुहरा छाया रहता है।

सूरज जैसे ओढ़ रजाई, अलसाया सा रहता है।

 

गली, मुहल्‍ले, चौराहों पर जले अलाव हैं।

घेरे बैठे ताप रहे सब हाथ पाँव हैं।

 

नये नये फल औ' सब्‍जी से मंडी पटी हुई है।

क्रिसमस और नये साल की मस्‍ती चढ़ी हुई है।

 

आओ कुछ उनकी भी सुधि लें, जो गरीब, बेघर हैं।

धरती है जिनकी शैया और छत अम्‍बर है।

 

कुछ गर्म वस्‍त्र उनको भी दें, जितनी हो शक्‍ति हमारी।

शीत ऋतु होती है, सब ऋतुओं पर भारी।

--

-सी ए. अनुराग तिवारी

5-बी, कस्‍तूरबा नगर,

सिगरा, वाराणसी- 221010

--

संक्षिप्‍त परिचय

नाम ः अनुराग तिवारी

पिता का नाम ः स्‍व. राम प्‍यारे तिवारी

माता का नाम ः स्‍व. सुशीला देवी

जन्‍म तिथि ः 09.05.1970

जन्‍म स्‍थान ः हमीरपुर, उ.प्र.

शिक्षा ः शिक्षा वाराणसी में हुई। काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय से बी. काम. उत्‍तीर्ण

करने के बाद चार्टर्ड एकाउन्‍टेन्‍सी की परीक्षा उत्‍तीर्ण की और तब से

बतौर सी. ए. प्रैक्‍टिस कर रहा हूँ।

लेखन ः साहित्‍य के प्रति मेरी रुचि बचपन से ही रही है और तभी से कविताएँ

लिखता आ रहा हूँ। मेरी कविताएँ कई पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो

चुकी हैं।

--

3 blogger-facebook:

  1. बहुत बढ़िया...
    शुभकामनाएँ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेनामी1:08 pm

    aapney to sardiyoo ka varnan badi sunderta key saath kiya hey....best wishes.....kalpana.varanasi

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------