मंगलवार, 24 जनवरी 2012

कैस जौनपुरी के नगमें - क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये, बिन तेरे अब जिया नहीं जाये

image
क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये

क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये
बिन तेरे अब रहा नहीं जाये
मिल जाये तू इक कतरा सही
बिन तेरे अब जिया नहीं जाये

दिल हुआ बेचैन है तेरे लिए
रस्ता देखे नैन हैं तेरे लिए
आ जाये कहीं अब छन से तू
बिन तेरे अब रहा नहीं जाये

याद आती है तेरी हर बात
वो छोटी ही सही इक मुलाकात
हुआ दिल मेरा बेक़रार तेरे लिए
बिन तेरे अब रहा नहीं जाये

वो तेरे आसपास की खुश्बू
तेरे मेरे अहसास की खुश्बू
दिल में मेरे बस गयी है तू
बिन तेरे अब जिया नहीं जाये
क्या कहूँ कुछ कहा नहीं जाये
बिन तेरे अब रहा नहीं जाये
मिल जाये तू इक कतरा सही
बिन तेरे अब जिया नहीं जाये

कैस जौनपुरी
qaisjaunpuri@gmail.com
www.qaisjaunpuri.com

Qais Jaunpuri

A factory of creative ideas...

Films I Ads I Literature

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------