अदिति मजूमदार की कविता - सैनिक

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सैनिक
 
 
हम अपनी चिंताओं से घीरे रहते
कभी सोचा है उन सैनिकों के बारे में
जो अपना आज देकर
हमारा कल संवारते है
 
देश की सुरक्षा पर मर मिटने वाले
अपना घर छोड़ दूसरों का घर बसने वाले
औरों के लिए जीने वाले
अपनी दुनिया दुश्मनों के इलाके में बसने वाले
 
वे सीमा पर खड़े, अपना सीना तान
भूल जाते है जीवन का प्रयाण
बढते रहते, लिए होंठों पर देश गान
बिना शर्त करते हमारे देश का ऊँचा मान
 
प्रत्यक्ष सैनिक न बन पाओ
देश के लिए कुछ कर जाओ
रण भूमि में  वीर बनो
जीवन को तुच्छ न बनने दो
 
अदिति मजूमदार 

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(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com  फतुहा पटना की कलाकृति )

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1 टिप्पणी "अदिति मजूमदार की कविता - सैनिक"

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