शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

शंकर लाल कुमावत की कविता - चुनाव का समय और नेता

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चुनाव का समय और नेता

जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है

फिजा का आलम बदलता जा रहा है

मिडिया पर जो विशेष कवरेज दिखाया जा रहा है

उसका सार मेरी समझ में कुछ ऐसे आ रहा है

कल तक जो नेता परहेज करता था

साथ में सफर करने से

वो आज उसी कैटल क्लास को

अपना माई- बाप बता रहा है

जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है

फिजा का आलम बदलता जा रहा है |

 

कल तक जो नेता दबंगई से बात-बात पर

उछाला करता था लोगो की इज्जत बाजारों में

वो आज अपनी इज्जत बचाने के लिए

आँसूओं की गंगा बहा रहा है

और तो और जो नेता VVIP था कल तक

आज एक-एक वोट के लिए दर-दर हाथ फैला रहा है

जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है

फिजा का आलम बदलता जा रहा है |

 

क्या “राज” और क्या “युवराज”

हर कोई वादों के चक्र चला रहा है

कोई आरक्षण का कोटा

तो कोई कोटे-में कोटा देकर लुभा रहा है

कोई मुफ्त में शिक्षा, तो कोई इलाज

कोई बेरोजगारी भत्ता, तो कोई मकान

और कोई शादी कराने का सपना दिखा रहा है

और तो और जिसे कल तक नफरत थी कंप्यूटर के नाम से

वो भी आज मुफ्त में लेपटॉप बाटने का बता रहा है

जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है

फिजा का आलम बदलता जा रहा है |

 

बावजूद इन तमाम हथकंडो के

कोई भी नेता जनता का मूड समझ नहीं पा रहा है

क्योकि भीड़ में जो आदमी आ रहा है भाषण सुनने के लिए

वो हाथ में काला झंडा लिए एक ही सवाल उठा रहा है

की पिछले चुनाव में जो वादा किया था आपने

उनमे से एक भी पूरा नजर क्यों नहीं आ रहा है ?

ये आसान सा सवाल आलाकमान के माथे पर सलवटे

और नेताओं के मुहं पर ताला लगा रहा है

जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है

फिजा का आलम बदलता जा रहा है |

--

-शंकर लाल, इंदौर, मध्यप्रदेश

ईमेल : shankar_kumawat@rediffmail.com

5 blogger-facebook:

  1. जैसे –जैसे चुनाव निकट आ रहा है
    कवियों की लेखनी में शहद घुलता जा रहा है
    .....मज़ा आ गया बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  2. saat samund ki mashi karoo, lekhan sah ban raye,
    sab dharti kagaj karoo, niyate neta likhi na jaye.

    thank you dear shankar, lage raho, aur aishe hee likhte raho
    with love
    TulaRam

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. shankar Lal11:24 am

      Thanks Dr. Saab for your kind words.
      Shankar

      हटाएं
  3. shankar Lal11:22 am

    Ratan prakash bhai and T.R.Verma bahut-bahut danywad.

    Shankar Lal, Indore

    उत्तर देंहटाएं

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