मोतीलाल की कविता - इस दुनिया के अलग अलग चेहरे

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

image

यह दुनिया
बिल्कुल नहीँ चलती
एक सत्य की छत के नीचे

यह दुनिया
बिल्कुल नहीँ चलती
अहिँसा के रास्तोँ पर

यह दुनिया
बिल्कुल नहीँ महकती
एक प्रेम की छाँव मेँ

यह दुनिया
बिल्कुल नहीँ रचती
एक जैसी अनेकोँ रचनाएँ

इस दुनिया मेँ
अलग-अलग चेहरे होते हैं
आदमियोँ के

सबके लिए
एक जैसा सत्य
एक जैसी अहिँसा
एक जैसा प्रेम
और एक जैसी रचना
उनके चेहरे से मेल नहीँ खाती

उनके लिए
दुनिया को चलाना
एक सही दिशा मेँ
जरूरी नहीँ होता
जरुरी होता है
अपने लिए जगह बनाना
इस भरी दुनिया मेँ
भले ही पवित्रता के आँच मेँ पका
सत्य, अहिँसा, प्रेम खंडित
होता रहे सदियोँ तक । 
 
* मोतीलाल/राउरकेला

--

(चित्र - अमरेन्द्र aryanartist@gmail.com  फतुहा पटना की कलाकृति)

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

1 टिप्पणी "मोतीलाल की कविता - इस दुनिया के अलग अलग चेहरे"

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.