गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

शशांक मिश्र भारती के दो बाल गीत

दो बालगीतः-

पतंग

आसमान में उड़ने वाली

हवा से बाते करने वाली,

हम सबको यह प्‍यारी है

रंग-बिरंगी पतंग निराली,

ऊपर नीचे को यह जाती

दाए-बाएं को मुड़ जाती,

कभी-कभी गुस्‍सा है लाती

जब डोर तोड़ उड़ जाती

बच्‍चों को यह प्‍यारी है

रंग बिरंगी -न्‍यारी है,

पतेग कटी तो भागे सब

आई देखो किसकी बारी है ॥

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बसन्‍त की न्‍यारी रानी

कूँ-कूँ करती गीत सुनाती

मधुर स्‍वरों में मन बहलाती,

प्‍यारी कोयल न्‍यारी कोयल

मन की उजली तन की काली,

भाती सबको बड़ी निराली

क्‍यों गाती हो मतवाली,

सुन्‍दर स्‍वर्णिम आवाज में

ऋतु बसन्‍त का तुम रानी,

आओ सभी का मन बहलाओ

नूतन ला सन्‍देशा सुनाओ,

आमों का फिर समय ला

सुन्‍दर मीठा रस पिलाओ,

हे बसन्‍त की प्‍यारी रानी

सुन्‍दर मोहक न्‍यारी रानी

--

सम्‍पर्कः-हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर-2424010प्र0 9410985048

ईमेल:-shashank.misra73@rediffmail.com

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